Health News: बाजारों में मिलने वाले पीले भूने चने हमेशा से लोगों की पसंद रहे हैं। सस्ते, कुरकुरे और त्वरित नाश्ते के रूप में इन्हें आसानी से खरीद लिया जाता है। लेकिन हाल में हुई जांच ने लोगों की इस आदत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कई राज्यों में जांच टीमों ने इन चनों में ‘औरामाइन’ नामक खतरनाक इंडस्ट्रियल केमिकल की मौजूदगी पाई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में भी चिंता बढ़ गई है।
खाद्य सामग्री में प्रतिबंधित, फिर भी खुलेआम मिलाया जा रहा केमिकल
औरामाइन आमतौर पर कपड़ा, चमड़ा और कागज उद्योग में रंग देने के लिए उपयोग होता है। इसे खाद्य पदार्थों में मिलाना कानूनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। लेकिन मिलावटखोर इसे चनों को ज्यादा चमकीला और आकर्षक बनाने के लिए रंग की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। कम कीमत पर बिकने वाले पैकेटों और सड़क किनारे मिलने वाले भुने चनों में इसकी मिलावट सबसे ज्यादा देखी गई है।
स्वास्थ्य पर सीधे हमले जैसा असर
विशेषज्ञों के मुताबिक औरामाइन एक कार्सिनोजेनिक केमिकल है—यानि लंबे समय तक इसका सेवन कैंसर का खतरा बढ़ा देता है। इसके अलावा यह लिवर, किडनी और इम्यून सिस्टम पर गंभीर असर डालता है। शरीर में यह धीरे-धीरे विषैले तत्व जमा करता है, जिससे एनिमिया, सांस की दिक्कतें, त्वचा रोग और पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर और भी खतरनाक हो सकता है।
कैसे पहचानें शुद्ध और मिलावटी चना
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शुद्ध भुने चने हल्के भूरे-पीले रंग के होते हैं और उनकी चमक प्राकृतिक लगती है। लेकिन औरामाइन मिले चने ज्यादा चटकीले, चिकने और अनियमित रूप से चमकदार दिखते हैं। हाथ पर रगड़ने पर हल्का रंग उतरना भी मिलावट का संकेत हो सकता है।
लोगों को सलाह दी गई है कि भरोसेमंद ब्रांड, अधिकृत दुकानों या सरकारी प्रमाणित पैकेजिंग वाले ही उत्पाद खरीदें। सड़क किनारे मिलने वाले अत्यधिक सस्ते चनों से दूरी बनाना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
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औरामाइन क्या है?
औरामाइन एक सिंथेटिक पीला रंग है, जिसे उद्योगों में कपड़ा, चमड़ा और कागज को रंगने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
यह खाने वाली चीजों में इस्तेमाल करने के लिए बना ही नहीं है।
सीधे शब्दों में कहें तो—ये एक इंडस्ट्रियल डाई है, कोई फूड कलर नहीं।
सेहत पर इसका कितना बुरा असर पड़ता है?
यह रंग शरीर के लिए इतना हानिकारक है कि दुनिया के लगभग सभी देशों में इसे खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
यह शरीर पर ऐसे असर करता है:
1. कैंसर का खतरा बढ़ाता है
औरामाइन को कार्सिनोजेनिक माना जाता है।
लंबे समय तक इसका सेवन कैंसर की संभावना बढ़ाता है—खासकर लिवर और ब्लैडर कैंसर का जोखिम।
2. लिवर और किडनी को नुकसान
यह धीरे-धीरे शरीर में जमा होता है और
लिवर व किडनी की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
लंबे समय में अंगों की कार्यक्षमता कम होने लगती है।
3. इम्यून सिस्टम कमजोर होता है
रसायन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हमला करता है।
बार-बार बीमार पड़ना, थकान, संक्रमण जल्दी होना—ये सब असर दिख सकते हैं।
4. खून और त्वचा से जुड़ी दिक्कतें
लगातार सेवन से एनिमिया, त्वचा पर रैश, एलर्जी और सांस की समस्या तक हो सकती है।
5. बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक
छोटे बच्चों का शरीर ऐसे केमिकल को संभाल नहीं पाता,
इसलिए असर कई गुना बढ़ जाता है।
बुजुर्गों में भी जोखिम ज्यादा होता है।
औरामाइन खाने वाली किसी भी चीज़ में होना ज़हर जैसे असर करता है। खासकर अगर यह चनों, स्नैक्स या सस्ते पैक्ड फूड में मिलाया गया हो।



