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Health News: आज के आधुनिक समय में बढ़ता वजन या मोटापा एक बड़ी समस्या बन चुका है, और अक्सर इसका दोष सीधे तौर पर हमारे खान-पान पर मढ़ा जाता है। मगर, आयुर्वेद के विशेषज्ञ एक और महत्वपूर्ण कारक की ओर इशारा करते हैं: यह शरीर में बढ़ते ‘कफ दोष’ का भी नतीजा हो सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में कफ और मेद (चर्बी) बढ़ जाता है, तो शरीर भारी होने लगता है। भूख कम लगने के बावजूद वजन तेजी से बढ़ता है। आयुर्वेद में इस स्थिति को ‘स्थौल्य’ कहा जाता है।
कफ बढ़ने के कारण: आलस्य और ठंडी चीजें
विशेषज्ञ बताते हैं कि कफ का गुण ठंडक, भारीपन और स्थिरता हैं। यही गुण जब शरीर में बढ़ जाते हैं, तो हमारा पाचन धीमा पड़ जाता है, मेटाबॉलिज्म सुस्त होता है और चर्बी जमा होने लगती है। खासकर पेट, कूल्हे और जांघों में चर्बी बढ़ना कफ-प्रधान मोटापे का मुख्य लक्षण है।
कफ बढ़ने के मुख्य कारणों में ठंडी-भारी चीजें जैसे दही, आइसक्रीम, ज्यादा दूध का सेवन, देर तक सोना, कम चलना-फिरना, तला-भुना, मीठा और फास्ट फूड ज्यादा खाना शामिल हैं। इसके अलावा, रात को देर से और भारी खाना तथा दिन में झपकी लेना या आलस्य भी प्रमुख वजह हैं।
कफ संतुलित करने के आयुर्वेदिक उपाय
आयुर्वेद कहता है कि कफ को संतुलित करने पर वजन अपने आप कम होने लगता है। इसके लिए कुछ आसान उपाय सुझाए गए हैं:
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दिन की शुरुआत गुनगुने पानी या नींबू-शहद के पानी से करें।
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मूंग दाल, खिचड़ी, जौ, दलिया जैसे हल्के भोजन को प्राथमिकता दें।
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करेला, मेथी, परवल, लहसुन-अदरक, हल्दी का इस्तेमाल बढ़ाएं।
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मीठा, तला हुआ, दही, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक का सेवन न के बराबर करें।
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रात का खाना हल्का और जल्दी खाएं, सुबह जल्दी उठें और दिन में सोने से बचें।
कपालभाति और अग्निसार जैसे प्राणायाम कफ दोष को संतुलित करने में मदद करते हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है और वजन प्राकृतिक रूप से कम होने लगता है।

