इम्यूनिटी बूस्ट करने के साथ तनाव भी कम करती है तुलसी

भारतीय परंपराओं के मुताबिक हर घर में तुलसी का पौधा होता है। अधिकांश घरों में इस पौधे की पूजा होती है। इसके साथ ही तुलसी का सेवन औषधि के रूप में भी किया जाता है। ऋषि-मुनियों ने लाखों साल पहले ही तुलसी की विशेषताओं को पहचान लिया था। इसलिए अलग-अलग तरह से इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है।

यह काफी असरदार औषधि है, जो कि कई बीमारियों को जड़ से खत्म कर सकती है और कई रोगों से छुटकारा भी दिला सकती है।
आयुर्वेद में तुलसी के पौधे के साथ उसकी लकड़ी का भी प्रयोग बताया गया है। यह भी कह सकते हैं कि इसके पौधे का हर भाग (जड़, शाखाएं, पत्ती और बीज) फायदेमंद होता है। पारंपरिक चिकित्सक तुलसी को ‘जड़ी-बूटियों की रानी’ कहते हैं। विज्ञान भी इसके गुणकारी होने की बात मान चुका है। इसलिए तमाम चीजों में तुलसी का प्रयोग किया जाता है।

हजारो वर्षों पूर्व आयुर्वेद शास्त्रों में तुलसी के बारे में बहुलता से जानकारियां दी गयी हैं जो वर्तमान में सटीक और प्रमाणिकता सिद्ध करती हैं। वैसे आयुर्वेद के अनुसार संसार के समस्त द्रव्य औषधि हैं और इसके अलावा कुछ नहीं। आयुर्वेद में आज भी हज़ारों योग स्वयं सिद्ध हैं सिर्फ हमें विशाल हृदय से उनको अपनाने की जरुरत हैं।

तुलसी एक औषधीय पौधा है, इसे अंग्रेजी में बेसिल कहते हैं। गुण एवं रंगों के आधार पर इसे कई प्रजातियों में बांटा गया है। जैसे-

ऑसीमम विरिडी
ऑसीमम सैक्टम
ऑसीमम ग्रेटिसिकम
ऑसीमम वेसिलिकम मिनिमम
ऑसीमम किलिमण्डचेरिकम
ऑसीमम वेसिलिकम मुन्जरिकी या मुरसा
ऑसीमम अमेरिकन गम्भीरा या मामरी

इनमें से ऑसीमम सैक्टम को पवित्र / होली तुलसी के नाम से जानते हैं। आसीमम ग्रेटिसिकम को वन तुलसा / राम तुलसी या अरण्यतुलसी नाम से जानते हैं। ऑसीमम अमेरिकन को काली तुलसी नाम से जानते हैं और ऑसीमम किलिमण्डचेरिकम को कर्पूर तुलसी नाम से जाना जाता है।
ऑसीमम सैक्टम यानी पवित्र / होली तुलसी भी दो तरह की होती है। हरे पत्तों वाली श्री तुलसी और बैगनी पत्तों वाली कृष्णा तुलसी।
भारत में अधिकतर घरों में पवित्र तुलसी ही होती है। इसका वैज्ञानिक नाम ऑसीमम टेनयूफ्लोरम है। यह मूल रूप से भारत में पाई जाती है। लेकिन अब ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम अफ्रीका में भी मिलती है। इसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में ‘एडाप्टोजन’ के रूप में किया जाता है।यानी यह शरीर के सिस्टम को सामान्य और मिश्रित करने में उपयोगी हैं।
पवित्र तुलसी के फायदे

  1. स्ट्रेस और एंग्जाइटी कम करे
    पवित्र तुलसी के पौधे के सभी भाग एडाप्टोजन के रूप में काम करते हैं। यह वो नेचुरल पदार्थ है जो शरीर को स्ट्रेस सहन करने के अनुकूल बनाता है और मेंटल बैलेंस /मानसिक संतुलन बनाए रखता है।
    साइंटिफिक रिसर्च से यह भी साफ हुआ है कि तुलसी में पाए जाने वाले औषधीय गुण कई प्रकार की दिमागी समस्याओं से निपटने में मददगार हैं।
    जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन के अनुसार, पवित्र तुलसी में डायजेपाम और एंटीडिप्रेसेंट ड्रग्स की तुलना में एंटीडिप्रेसेंट और एंटी-एंग्जाइटी प्रोपर्टीज अधिक पाई जाती हैं।
    स्टडी के मुताबिक यदि कोई एक दिन में 500 मिलीग्राम पवित्र तुलसी के अर्क का सेवन करता है, तो उसे स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन से काफी राहत मिल सकती है।
  2. इम्यूनिटी बूस्ट
    लोगों ने कई योग निकाले है उसमें इम्यूनिटी बढ़ाने वाली औषधियों में गिलोय, अश्वगंधा और तुलसी का प्रयोग किया है। यह बात पूरी तरह सही है कि तुलसी के सेवन से इम्यूनिटी बढ़ती है।
    तुलसी, इम्यूनिटी की हेल्पर कोशिकाओं Th1 और Th2 के रिस्पांस को बढ़ाती है। Th1 कोशिकाएं बैक्टीरिया और वायरस जैसे इंट्रासेल्युलर परजीवी के खिलाफ रिस्पांस करती है। वहीं Th कोशिकाएं हेलमन्थ्स और अन्य बाह्य परजीवी के खिलाफ रिस्पांस /प्रभाव करती हैं। इससे आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है और किसी भी वायरस का आपके ऊपर असर नहीं होता।
    तुलसी भी शरीर के नेचुरल पीएच लेवल को सही करने में भी मदद करती है और आंत के माइक्रोफ्लोरा के अंदर हेल्दी बैक्टीरिया को बढ़ाती है, जिससे इम्यूनिटी बढ़ती है और डाइजेशन सही रहता है।
    स्टडी के मुताबिक तुलसी पत्ते के 300 मिलीग्राम अर्क या कैप्सूल के सेवन से हेल्पर कोशिका और नेचुरल किलर सेल की एक्टिविटी में वृद्धि हुई है।
  3. त्वचा को स्वस्थय रखे
    तुलसी का तेल स्किन को अंदर से साफ करने में मदद करता है। यह ऑयली स्किन के लिए एक्सीलेंट स्किन क्लींजर है।
    यह गंदगी और अशुद्धियों को शरीर से हटाने में मददगार है। तुलसी के पत्ते, चंदन और गुलाब जल का पेस्ट बनाकर अपने चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाएं। बाद में ताजी पानी से धो लें।
    आप देखेंगे कि आपकी स्किन खिल उठेगी और तुलसी के मजबूत एंटी-इंफ्लेमेटरी एंटी-माइक्रोबायल गुण त्वचा को बेहतर रखने में मदद करेंगे।
  4. एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण देंगे राहत
    पवित्र तुलसी के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं। ये गठिया या फाइब्रोमायल्गिया से ग्रस्त लोगों को राहत दे सकती है।
    एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण तुलसी का सेवन बुखार, सिरदर्द, गले में खराश, सर्दी, खांसी, फ्लू में भी राहत दे सकता है।
    तुलसी के अर्क पर हुई एक स्टडी के मुताबिक मानव कोशिकाओं में एंटी-इंफ्लेमेटरी एक्टिविटी दिखी, जो हार्ट डिजीज के इलाज के पारंपरिक उपयोग की पुष्टि करता है।
    तुलसी के ताजे पत्तों और तनों के शुद्धिकरण से यूजेनॉल, सिरसिलीनोल, सिरसिमारिटिन, आइसोथाइमोनिन, एपी जेनिन और रोजमरीन एसिड निकलते हैं।
    इनकी एंटी-इंफ्लेमेटरी एक्टिविटी, क्रमशः 10-, 10-, और 1000- माइक्रोन सांद्रता पर इबुप्रोफेन, नेप्रोक्सन और एस्पिरिन के बराबर थी।
  5. हृदय को स्वस्थ्य रखे
    तुलसी के पत्तों का एक्सट्रेक्ट पीने से हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार हार्ट टिश्यूज की सूजन कम हो जाती है।
    तुलसी के एक्सट्रेक्ट पर हुई स्टडी के मुताबिक मानव कोशिकाओं में महत्वपूर्ण एंटी- इंफ्लेमेटरी एक्टिविटी दिखाई दी, जो हार्ट डिजीज के इलाज में काम आ सकता है।
    तुलसी के पत्ते का एसेंशियल ऑयल कोलेस्ट्रॉल कम करने और इसके एंटीऑक्सिडेंट प्रभाव से दिल की रक्षा करता है। जिससे हार्ट स्वस्थ रहता है और अच्छी तरह काम कर पाता है।
  6. अन्य फायदे
    तुलसी ब्लड शुगर कंट्रोल करके डायबिटीज बैलेंस रख सकती है।
    लिवर को फंक्शन करने में मदद करने के साथ ही बॉडी को डिटॉक्स रखती है।
    तुलसी का सेवन बालों को हेल्दी रखने में भी मदद करता है।
    एंटी-वायरल एक्टिविटीज को बढ़ावा दे सकती है।
    ये एंटीऑक्सीडेंट का काफी अच्छा सोर्स है।
    तुलसी की कितनी मात्रा का सेवन करें
    तुलसी को यदि आप अर्क के रूप में लेना चाहते हैं तो इसकी कोई लिमिट नहीं है। तुलसी के पत्ती को चाय में डालकर भी ले सकते हैं। यदि आप तुलसी का अर्क पीना चाहते हैं तो एक कप पानी में तीन-चार पत्ती डालकर उबाल लें।
    इसे 5-6 मिनट तक उबालने के बाद पी लें। इस तरह आप दो कप अर्क भी पी सकते हैं।
    यदि आप तुलसी एक्सट्रेक्ट के कैप्सूल का सेवन करते हैं तो रोजाना 300 मिलीग्राम से 2,000 मिलीग्राम तक ले सकते हैं।
    इसके अलावा तुलसी के पत्तों को पौधे से तोड़ने के बाद धोकर भी खा सकते हैं या किसी फूड के साथ भी खा सकते हैं।
    यदि आप तुलसी अर्क का सप्लीमेंट लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात जरूर करें। लेकिन यदि आप घर में तुलसी का सेवन किसी भी रूप में करते हैं तो पौधे से तोड़ने के बाद उसे अच्छी तरह से धोने के बाद ही उसका सेवन करें।
    वर्तमान में कोरोना संक्रमण में इसका भरपूर उपयोग होने से इससे बहुत सीमा तक बचाव हुआ हैं।
  7. सावधानी – तुलसी के पत्तों को दांत से काँट कर नहीं खाना चाहिए। कारण इसमें आंशिक रूप में पारा होने से दांतों को ख़राब होने की संभावना होती हैं। -विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन