Bihar News: बिहार में धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देने जा रहे पुनौराधाम में एक ऐतिहासिक पल रचने वाला है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 7 अगस्त को पटना पहुंचेंगे और 8 अगस्त को सीतामढ़ी के पुनौराधाम में मां जानकी मंदिर के निर्माण के लिए भूमिपूजन और शिलान्यास करेंगे। उनके साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई गणमान्य अतिथि, मंत्रीगण और साधु-संत उपस्थित रहेंगे।
गृह मंत्री का यह दौरा धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया गया है कि वे 7 अगस्त की रात पटना में रुकेंगे और अगले दिन सुबह पुनौराधाम के लिए प्रस्थान करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर जिला और राज्य प्रशासन में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
माँ जानकी मंदिर के निर्माण का वास्तु डिजाइन अयोध्या राम मंदिर के मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा द्वारा तैयार किया गया है। मंदिर की ऊंचाई 156 फीट होगी, जो अयोध्या के राम मंदिर से केवल 5 फीट कम होगी। इसे एक भव्य धार्मिक तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें धर्मशालाएं, धार्मिक संग्रहालय, यात्री सुविधाएं, और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाले कई अन्य संसाधन शामिल होंगे।
इस पूरे प्रोजेक्ट पर 882 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी और इसे 36 महीने की अवधि में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। यह केवल बिहार ही नहीं बल्कि पूरे भारत के धार्मिक मानचित्र पर पुनौराधाम को विशेष स्थान दिलाएगा। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। हजारों की संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।
कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा और पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने स्वयं पुनौराधाम का दौरा किया और भूमिपूजन स्थल, जनसभा स्थल, हेलीपैड, पार्किंग एरिया और यातायात मार्गों का गहन निरीक्षण किया। सभी संबंधित विभागों को कार्य की गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया गया है।
सीतामढ़ी की जिलाधिकारी रिची पांडेय ने बताया कि यह आयोजन सीतामढ़ी के लिए गौरव का विषय है और इसे अनुशासन और गरिमा के साथ संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह से जुटा हुआ है। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।
जानकारों का कहना है कि पुनौराधाम में जानकी मंदिर के निर्माण से न केवल सीता माता के जन्मस्थान को धार्मिक पहचान मिलेगी, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन, रोजगार और स्थानीय विकास का केंद्र भी बनेगा।



