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India News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन एक बार फिर अपनी सख्त और अमानवीय नीतियों को लेकर चर्चा में है। मोहाली की रहने वाली 73 वर्षीय हरजीत कौर को हथकड़ी और बेड़ियों में जकड़कर भारत डिपोर्ट किया गया। यह घटना न सिर्फ परिवार के लिए बल्कि अमरीका में बसे लाखों अप्रवासियों के लिए भी गहरी चिंता का विषय बन गई है।
तीन दशक से अमेरिका में बसीं, कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं
हरजीत कौर करीब 32 साल से अमेरिका में रह रही थीं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। 1992 में अपने बेटों के साथ भारत से अमेरिका आईं हरजीत कौर की असाइलम अर्जी 2012 में खारिज हो गई थी। तब से वह हर छह महीने में लगातार आईसीई (यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स इन्फोर्समेंट) ऑफिस में रिपोर्ट करती रहीं। बावजूद इसके, पिछले दिनों एक रूटीन चेक-इन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
विरोध और रिहाई की मांग के बावजूद डिपोर्टेशन
हरजीत कौर की रिहाई की मांग को लेकर कई भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिका में प्रदर्शन किए, लेकिन प्रशासन ने उनकी उम्र, स्वास्थ्य और पारिवारिक दलीलों को दरकिनार कर दिया। परिवार के अनुसार, हिरासत में लेने के बाद हरजीत कौर को न वाजिब सुविधाएं दी गईं, न ही अपने परिवार से मिलने की इजाजत मिली। ईस्ट-बे में रिपोर्ट के दौरान उन्हें अचानक बंदी बनाया गया और फिर अन्य 132 भारतीय नागरिकों के साथ ICE के चार्टर्ड विमान से जॉर्जिया ले जाया गया।
अमानवीय हालात में किया गया यात्रा
परिवार के नजदीकी लोगों के अनुसार, डिपोर्ट करते समय हरजीत कौर को हथकड़ी-बेड़ियों में जकड़ दिया गया। उन्हें न बैठने के लिए कुर्सी, न सोने के लिए बिस्तर मिला। अमृसर पहुंचने के बाद भी वह काफी बुरी हालत में थीं, लगातार रो रही थीं और मदद की गुहार लगा रही थीं।
परिवार में मायूसी, प्रशासन पर नाराजगी
हरजीत कौर की बहू मंजी कौर और पोती सुखमीत कौर दोनों ने अमेरिकी प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। परिवार फिलहाल किसी से मिलना या बातचीत करने की हालत में नहीं है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में है और अप्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, सम्मान और इंसाफ से जुड़े गंभीर सवाल उठा रहा है।

