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New Delhi: वजन घटाने और डायबिटीज नियंत्रण के लिए दुनिया भर में तहलका मचाने वाली दवा ‘वेगोवी’ अब भारत में बेहद किफायती दाम पर उपलब्ध होने जा रही है। डेनमार्क की दिग्गज कंपनी नोवो नॉर्डिस्क का ‘सेमाग्लूटाइड’ साल्ट पर पेटेंट समाप्त होते ही भारतीय दवा कंपनियों ने इसके सस्ते जेनेरिक संस्करण बाजार में उतार दिए हैं। इस क्रांतिकारी बदलाव ने वजन घटाने के उस इलाज को, जिसकी कीमत पहले 16,000 रुपये प्रति माह तक जाती थी, अब सीधे 1,300 रुपये से भी नीचे ला दिया है।
अभी तक भारत में मूल दवा वेगोवी की मासिक खुराक के लिए लोगों को 10,850 से 16,400 रुपये खर्च करने पड़ते थे। लेकिन अब नैटको फार्मास्युटिकल्स (Natco) और एरिस लाइफसाइंसेज (Eris) जैसी घरेलू कंपनियों ने इसे अपनी पहुंच में ला दिया है। नैटको ने अपने ब्रांड ‘सेमनैट’ और ‘सेमाफुल’ के तहत सबसे कम डोज (2 एमजी) की कीमत मात्र 1,290 रुपये तय की है। वहीं, एरिस लाइफसाइंसेज भी ‘संडे’ ब्रांड नाम से इसी किफायती दर पर दवा उपलब्ध कराएगी।
40 से ज्यादा कंपनियां कतार में, बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
बाजार के आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल नैटको और एरिस ने शुरुआत की है, लेकिन डॉ. रेड्डीज, जायडस, ल्यूपिन और अल्केम जैसी करीब 43 भारतीय कंपनियों को इस साल्ट के निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है या वे प्रक्रिया में हैं। आने वाले महीनों में जब ये सभी दिग्गज कंपनियां मैदान में उतरेंगी, तो प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कीमतें और भी गिर सकती हैं।
नैटको की ‘सेमनैट’ दवा वजन घटाने के लिए और ‘सेमाफुल’ डायबिटीज के इलाज में काम आएगी। कंपनी अगले महीने सुविधाजनक ‘इंजेक्शन पेन डिवाइस’ भी लॉन्च करने वाली है, जिनकी कीमत 4,000 से 4,500 रुपये के बीच होगी।
क्या है सेमाग्लूटाइड का जादू?
मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के लिए तैयार किया गया ‘सेमाग्लूटाइड’ मोटापे को नियंत्रित करने में चमत्कारी साबित हुआ है। यह जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट श्रेणी की दवा है, जो मस्तिष्क को भूख कम लगने का संकेत देती है और ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है। नोवो नॉर्डिस्क इसी साल्ट से ‘वेगोवी’ और ‘ओजेम्पिक’ जैसी महंगी दवाएं बनाती थी, लेकिन अब भारतीय कंपनियों के इस कदम से करोड़ों भारतीयों को मोटापे की समस्या से लड़ने में बड़ी मदद मिलेगी।
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