India News: 31 मार्च 2020 को हजरत निजामुद्दीन थाने के तत्कालीन एसएचओ की शिकायत पर मौलाना साद और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि 21 मार्च 2020 को व्हाट्सऐप पर एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें मौलाना साद कथित तौर पर अपने अनुयायियों से कोरोना काल में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग नियमों की अवहेलना कर धार्मिक जमावड़े में शामिल होने की अपील कर रहे थे। अब इस मामले की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मौलाना ने लॉकाडाउन तोड़ने के लिए मुस्लिमों को नहीं उकसाया।
रिपोर्ट के मुताबिक मौलाना साद अब तक जांच में शामिल नहीं हुए हैं। उनका लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में भेजे गए हैं। पहले दौर की जांच में लैपटॉप में सुरक्षित भाषणों की समीक्षा की गई थी, जिनमें कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।
पिछले महीने दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 एफआईआर और 70 भारतीयों पर दर्ज चार्जशीट को रद्द करते हुए कहा था कि सिर्फ मरकज में रहना ही सरकारी आदेशों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता है।
पूर्व पुलिस आयुक्त एस.एन. श्रीवास्तव चार साल पहले रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब इस जांच से उनका कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, क्राइम ब्रांच के विशेष पुलिस आयुक्त और दिल्ली पुलिस प्रवक्ता इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामी संगठन तबलीगी जमात पर आरोप था कि उसने 13 से 15 मार्च 2020 के बीच दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक सम्मेलन आयोजित किया, जिससे कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैला। 36 देशों के 952 विदेशी नागरिकों पर चार्जशीट दायर की गई थी। मई और जून 2020 में कुल 48 चार्जशीट और 11 सप्लीमेंट्री चार्जशीट अदालत में दाखिल की गईं। मुकदमे के दौरान 44 विदेशी नागरिकों ने ट्रायल का विकल्प चुना, जबकि 908 ने दोष स्वीकार कर 4,000 से 10,000 तक का जुर्माना भरा।



