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Ranchi News: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने झारखंड की राजधानी रांची में हुए 5.33 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में 10 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। इस मामले में शामिल लोगों में बैंक अधिकारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वैलुअर, दो कर्जदार, दो सप्लायर और एक डायग्नोस्टिक सेंटर का मालिक शामिल हैं।
इस घोटाले की शिकायत बैंक ऑफ इंडिया के वरीय अधिकारियों द्वारा की गई थी, जिसके आधार पर CBI ने अगस्त 2024 में मामला दर्ज किया और जांच अधिकारी के रूप में चंदन कुमार सिंह को नियुक्त किया।
जांच में सामने आया कि मयंक साहा और उनकी पत्नी रोमी साहा ने मिलकर बैंक से फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों का कर्ज लिया। उन्होंने 38 लाख रुपये का होम लोन, 1.50 करोड़ रुपये का कैश क्रेडिट लोन और 3 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया।
होम लोन के लिए मयंक साहा ने फरवरी 2018 में आवेदन दिया था, जिसे बैंक ऑफ इंडिया के रिटेल बैंकिंग सेंटर ने स्वीकृत कर रातू रोड शाखा भेजा। इसके बाद कैश क्रेडिट लोन के लिए SMECC शाखा में आवेदन दिया गया, जिसमें मयंक साहा ने अपनी कंपनी “मेसर्स आइकॉन इंफ्रा सर्विस” के नाम पर बड़े वर्क ऑर्डर का दावा किया।
मई 2018 में रोमी साहा ने अपनी फर्म “मेसर्स क्लियर इमेजिंग सर्विस” के नाम पर तीन करोड़ रुपये के टर्म लोन का आवेदन किया, जिसमें यह बताया गया कि यह रकम ट्रस्ट डायग्नोस्टिक सेंटर के साथ पार्टनरशिप में MRI मशीन की खरीद के लिए उपयोग की जाएगी।
जांच में CBI को पता चला कि न तो MRI मशीन कभी खरीदी गई और न ही उसकी जरूरतों की पुष्टि हुई। इसके बावजूद MRI मशीन खरीदने के नाम पर राजेश कुमार श्रीवास्तव और कुमार राकेश नामक सप्लायर्स से कोटेशन लिए गए। चार्टर्ड अकाउंटेंट पंकज अग्रवाल ने आवश्यक फर्जी दस्तावेज तैयार किए और बैंक वैलुअर संजय कुमार ने उसे वैध ठहराया।
इस साजिश में बैंक के तीन वरिष्ठ अधिकारी – केवल कुमार गर्ग (एजीएम), जयकांत लाल दास (अधिकारी) और सुब्रता हलधर (वित्त पदाधिकारी) – भी शामिल थे, जिन्होंने जानबूझकर लोन स्वीकृत किया।
CBI ने पाया कि मयंक और रोमी साहा ने जिस हीरा हाईट्स के चार फ्लैट को गिरवी रखा था, वह निर्माणाधीन इमारत थी, जिसे ट्रस्ट डायग्नोस्टिक सेंटर के जतिन सहाय बना रहे थे। दस्तावेजों में फ्लैटों का स्वामित्व दिखाकर लोन लिया गया, जो कि भ्रामक और फर्जी निकला।
CBI की चार्जशीट में जिन 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है, वे हैं:
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जतिन सहाय – मालिक, ट्रस्ट डायग्नोस्टिक सेंटर
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केवल कुमार गर्ग – एजीएम, बैंक ऑफ इंडिया
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जयकांत लाल दास – बैंक अधिकारी
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सुब्रता हलधर – वित्त पदाधिकारी, बैंक ऑफ इंडिया
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मयंक साहा – प्रोपराइटर, क्लियर इमेजिंग सर्विस
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रोमी साहा – प्रोपराइटर, क्लियर इमेजिंग सर्विस
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पंकज अग्रवाल – चार्टर्ड अकाउंटेंट
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संजय कुमार – बैंक वैलुअर
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राजेश कुमार श्रीवास्तव – MRI सप्लायर
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कुमार राकेश – MRI सप्लायर
CBI अब इस मामले को कोर्ट में पेश करेगी। घोटाले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है और अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

