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India News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हर साल ज्येष्ठ माह के पहले बड़ा मंगल का इंतजार भक्तों को बेसब्री से रहता है। इस दिन की विशेषता यह है कि यह दिन हनुमान जी की पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन, लखनऊ के हर कोने में बजरंगबली की भक्ति का गूंज सुनाई देती है और हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ जैसे धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन बड़ा धूमधाम से किया जाता है। लखनऊ की गलियों और चौराहों पर भक्ति गीतों का माहौल देखने को मिलता है और चारों ओर उल्लास और आनंद का वातावरण बन जाता है।
बड़ा मंगल पर हनुमान जी की पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह दिन ज्येष्ठ माह के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इस दिन पूजा से हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं। लखनऊ में इस दिन भंडारे का आयोजन एक पुरानी परंपरा है जो करीब 400 साल पुरानी है। इस परंपरा की शुरुआत अलीगंज हनुमान मंदिर से हुई थी, जहां पर पहले यह आयोजन छोटे स्तर पर हुआ करता था। लेकिन अब यह आयोजन वृहद रूप धारण कर चुका है, और लखनऊ के हर इलाके, गली, नुक्कड़, और चौराहे पर भंडारे आयोजित किए जाते हैं।
बड़ा मंगल पर विशेष रूप से भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें पूड़ी-चावल, कढ़ी, सब्जी, और बूंदी का प्रसाद वितरित किया जाता है। इसके साथ ही, अलीगंज हनुमान मंदिर, हनुमान सेतु, और हनुमतधाम जैसे प्रमुख हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इन मंदिरों में बजरंग बली के जयकारे सुनाई देते हैं और पूरी मंदिर परिसर में रंगीन सजावट की जाती है।
नगर निगम की विशेष तैयारी
लखनऊ में बड़ा मंगल के इस विशाल आयोजन के मद्देनजर नगर निगम ने भी खास तैयारियां की हैं। नगर निगम के 348 स्थानों पर भंडारे के लिए पंजीकरण कराया गया है। इन स्थलों पर नगर निगम की टीम सफाई और व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के लिए काम करती है। इसके अलावा, नगर निगम के कंट्रोल रूम पर भी पंजीकरण की व्यवस्था की गई है, जहां लोग फोन करके या लखनऊ वन एप के जरिए भंडारे के लिए पंजीकरण करा सकते हैं।
स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भंडारे में प्लास्टिक के सामान का उपयोग नहीं किया जा रहा है। कूड़ेदान की भी व्यवस्था की गई है ताकि आसपास का वातावरण साफ-सुथरा रहे। इस परंपरा को मंगलमान अभियान के तहत और भी सुविधाजनक बनाने की कोशिश की जा रही है। राम कुमार तिवारी (मंगलमान अभियान के प्रमुख) का कहना है कि भारतीय परंपराओं को समय के साथ बदलते हुए समाजिक सुधार का माध्यम बनाना आवश्यक है। इस अभियान के जरिए हम न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखते हैं, बल्कि उसे नए रूप में प्रस्तुत भी करते हैं।
बड़ा मंगल का सामाजिक महत्व
लखनऊ के बड़ा मंगल के आयोजन का सामाजिक महत्व भी काफी है। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक समाजिक पहल बन चुका है, जो लोगों को एकजुट करता है और समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देता है। यह आयोजन शहर के सभी वर्गों के लोगों के लिए एक साथ आने का अवसर बनता है।
इस आयोजन के माध्यम से, लखनऊ में न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रदर्शन होता है, बल्कि यह सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का भी एक जरिया बन चुका है। हर साल बड़ा मंगल पर आयोजित होने वाले इन भंडारों और धार्मिक आयोजनों के कारण लखनऊ के सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में भी एक बदलाव देखा जाता है।

