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Ranchi: झारखंड में पारा शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर आई है। राज्य की सोरेन सरकार के मंत्रियों ने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि किसी भी पारा शिक्षक की नौकरी नहीं जाएगी और वे 60 वर्ष की आयु तक सुरक्षित रूप से अपनी सेवा जारी रख सकते है। यह भरोसा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने पारा शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में दिया।
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सेवा सुरक्षा: झारखंड के करीब 45 हजार पारा शिक्षकों की सेवा 60 वर्ष की आयु तक सुरक्षित रहेगी।
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अनुकंपा नियुक्ति: सेवा के दौरान मृत्यु होने पर आश्रित को मिलेगी नौकरी, कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कोर्ट के आदेश के 5 दिनों के भीतर सरकार लेगी बड़ा फैसला।
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स्वतंत्र रेगुलेटर: सरकारी और निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए प्राधिकरण का गठन।
धुर्वा में हुई ‘भविष्य’ पर चर्चा
रांची में मंत्री सुदिव्य कुमार के धुर्वा स्थित आवास पर करीब एक घंटे चली बैठक में पारा शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, भविष्य और मानवीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि करीब 45 हजार पारा शिक्षक बिना किसी चिंता के अपना कार्य जारी रखें। सोरेन सरकार ने साफ किया कि रिटायरमेंट की निर्धारित आयु 60 वर्ष से पहले किसी की सेवा समाप्त नहीं की जाएगी। इतना हीद नहीं बैठक में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर सहमति बनी। यदि सेवा के दौरान किसी पारा शिक्षक का निधन होता है, तब उनके आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का प्रस्ताव कैबिनेट की अगली बैठक में लाया जाएगा। इससे शिक्षकों के परिवारों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
सोरेन सरकार ने बताया कि पारा शिक्षकों से जुड़ा मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। शीर्ष न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, उसके पांच दिनों के भीतर राज्य सरकार बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करेगी। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार इस मुद्दे के समाधान को लेकर गंभीर है।
स्कूलों के लिए बनेंगे नए मानक
इस बीच, राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य मंत्रिपरिषद ने “राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण” के गठन को मंजूरी दी है, जो एक स्वतंत्र नियामक निकाय के रूप में काम करेगा। यह प्राधिकरण सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए न्यूनतम मानक तय करेगा। यह जिम्मेदारी झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को सौंपी गई है। यह संस्था स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं, शिक्षकों की योग्यता, बच्चों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मानक निर्धारित करेगी। साथ ही, सभी विद्यालयों को इन मानकों के पालन की स्व-घोषणा करनी होगी।

