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New Delhi: देश में हवाई यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने घरेलू उड़ानों पर लगाई गई अस्थायी किराया सीमा (Airfare Cap) को हटाने का फैसला लिया है, जो आज सोमवार से प्रभावी हो गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय एयरलाइंस पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों और गिरते रुपये जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं।
बता दें कि दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानों में बड़े पैमाने पर आए व्यवधान के बाद टिकटों की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। उस स्थिति को नियंत्रित करने और यात्रियों को लूट से बचाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 6 दिसंबर को एक ‘कैप’ लगाया था, जिसमें दूरी के आधार पर अधिकतम किराया तय कर दिया गया था। अब मंत्रालय ने स्थिति की समीक्षा के बाद इस बंदिश को खत्म करने का आदेश जारी कर दिया है।
सरकार की पैनी नजर, मनमानी पर मिलेगी सजा
किराया सीमा हटाने के साथ ही मंत्रालय ने एयरलाइंस को सख्त हिदायत भी दी है। कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे कीमतों में अनुशासन बरतें और किरायों को पारदर्शी व उचित रखें। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी एयरलाइन ने पीक सीजन या आपात स्थिति का फायदा उठाकर अनुचित तरीके से दाम बढ़ाए, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। नागरिक उड्डयन विभाग रीयल-टाइम आधार पर किरायों की निगरानी करेगा और जरूरत पड़ने पर दोबारा नियंत्रण लागू किया जा सकता है।
क्या था पुराना फार्मूला जिसे आज हटा दिया गया?
अब तक एयरलाइंस निम्नलिखित सीमा से अधिक किराया नहीं वसूल सकती थीं:
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500 किमी तक: अधिकतम 7,500 रुपये
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500-1,000 किमी: अधिकतम 12,000 रुपये
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1,000-1,500 किमी: अधिकतम 15,000 रुपये
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1,500 किमी से अधिक: अधिकतम 18,000 रुपये
आज से यह फार्मूला इतिहास बन गया है। अब उड़ानों का किराया पूरी तरह से ‘डिमांड और सप्लाई’ के बाजार नियम पर आधारित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे व्यस्त रूटों पर किराया बढ़ सकता है, लेकिन एयरलाइंस को अपने बढ़ते खर्चों को मैनेज करने में मदद मिलेगी।

