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Tehran, Iran — मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण युद्ध और इजरायल-अमेरिका के साथ चरम पर पहुंचे तनाव के बीच ईरान ने अपने नए सर्वोच्च नेता की घोषणा कर दी है। दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद, उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया ‘सुप्रीम लीडर’ नियुक्त किया गया है। सोमवार को हुई इस औपचारिक घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है।
मोजतबा खामेनेई को ईरान के सत्ता गलियारों में एक प्रभावशाली “पावर ब्रोकर” और “गेटकीपर” के रूप में जाना जाता है। हालांकि उन्होंने कभी कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन अपने पिता के कार्यालय के भीतर रहकर उन्होंने देश के बड़े नीतिगत फैसलों और राजनीतिक संतुलन को गहराई से प्रभावित किया है। वर्ष 2022 में उन्हें ‘अयातुल्ला’ की उपाधि दी गई थी, जिसे उनके उत्तराधिकारी बनने की तैयारी के तौर पर देखा गया था।
सुरक्षा बलों से करीबी और सख्त मिजाज— सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, मोजतबा खामेनेई के दो पहलू उनकी पहचान को खास बनाते हैं। पहला, ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के साथ उनके बेहद करीबी और मजबूत संबंध। दूसरा, पश्चिमी देशों के प्रति उनका कड़ा विरोध। साल 2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, जिसमें उन पर बिना किसी पद के सत्ता के फैसलों में हस्तक्षेप करने का आरोप था। आलोचकों का यह भी मानना है कि 2009 के विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से दबाने के पीछे मोजतबा का ही हाथ था।
भविष्य की रणनीति पर विशेषज्ञों की राय— विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति में किसी नरम रुख की उम्मीद कम है। सुरक्षा संस्थानों का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है तथा घरेलू विरोध प्रदर्शनों के प्रति सरकार और सख्त हो सकती है। संकेत मिल रहे हैं कि मोजतबा अपने पिता की कठोर नीतियों को ही आगे बढ़ाएंगे और अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपने रुख पर कायम रहेंगे। ऐसे में यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में चल रहा युद्ध और कूटनीतिक तनाव जल्द कम होने वाला नहीं है।
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