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Spiritual Desk: सनातन परंपरा में समय की गणना का आधार पंचांग ही है, जो हमें कर्म और फल के सही तालमेल की राह दिखाता है। गुरुवार, 5 मार्च 2026 का दिन आध्यात्मिक और व्यावहारिक दोनों ही दृष्टि से बेहद खास होने वाला है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को जहां देवगुरु बृहस्पति का आशीर्वाद प्राप्त है, वहीं ग्रहों की स्थिति भी कुछ विशेष ‘विजयी’ संकेत दे रही है।
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शुभ संयोग और मुहूर्त का गणित— गुरुवार को उदयातिथि के अनुसार द्वितीया तिथि रहेगी, जो शाम 5:03 बजे तक प्रभावी है। इस दिन का सबसे बड़ा आकर्षण अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:09 से 12:56) और विजय मुहूर्त (दोपहर 02:30 से 03:16) का संयोग है। ज्योतिष शास्त्र में इन दोनों मुहूर्तों को किसी भी नए व्यापार की शुरुआत, महत्वपूर्ण अनुबंध (Contract) या कानूनी मामलों में सफलता के लिए अचूक माना गया है।
नक्षत्रों की चाल देखें तो सुबह 08:17 तक उत्तराफाल्गुनी और उसके बाद हस्त नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। हस्त नक्षत्र में किए गए कार्यों में कुशलता और सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है।
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भद्रा और राहुकाल का पहरा— जहां एक ओर शुभ संयोग हैं, वहीं कुछ समय सावधान रहने की भी आवश्यकता है। दोपहर 02:00 बजे से 03:28 बजे तक राहुकाल रहेगा, जिसमें किसी भी नए काम की शुरुआत वर्जित है। इसके अतिरिक्त, इस दिन भद्रा की छाया भी रहेगी, अतः मांगलिक कार्यों से पहले भद्रा का विचार अवश्य करें। यमगण्ड और गुलिक काल का समय भी पंचांग में सावधानी बरतने वाला बताया गया है।
पूजा का विधान और उपाय— गुरुवार का दिन भगवान नारायण, मां पीताम्बरा और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है। यदि आप आर्थिक बाधाओं से जूझ रहे हैं या करियर में तरक्की चाहते हैं, तो भगवान विष्णु को हल्दी, चने की दाल और पीले फलों का भोग लगाएं। ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप इस दिन सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा।

