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Chainpur, (Gumla): सरकार एक तरफ ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ जैसे नारों पर करोड़ों रुपये खर्च कर शिक्षा का स्तर सुधारने का दावा कर रही है, वहीं चैनपुर प्रखंड में धरातल पर हकीकत बेहद शर्मनाक है। यहां के दो विद्यालयों राजकीय उत्क्रमिक उच्च विद्यालय भठौली और राजकीयकृत मध्य विद्यालय सिलफरी में शिक्षा के अधिकार की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रसोइया संयोजिका का हड़ताल जाते ही। बच्चों से खाना बनवाया जा रहा है ।
कलम छोड़ चूल्हा फूंक रहे नौनिहा
ताजा मामले के अनुसार, रसोइया संयोजिका के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के बाद विद्यालय प्रबंधन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने के बजाय मासूम बच्चों को ही रसोई के काम में झोंक दिया है। जिस उम्र में बच्चों को क्लासरूम में होना चाहिए, वहां वे धुएं के बीच मिड-डे मील तैयार करते नजर आए।
मीडिया को देख मची अफरा-तफरी, सच छिपाने की कोशिश
जब मीडिया की टीम विद्यालय पहुंची, तो वहां का नजारा देख प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। कैमरे को देखते ही आनन-फानन में बच्चों को रसोई घर से बाहर निकाला गया। सूत्रों के अनुसार, शिक्षकों ने बच्चों को मीडिया के सामने मुंह न खोलने की सख्त हिदायत भी दी, जो स्पष्ट रूप से मामले को रफा-दफा करने की कोशिश दर्शाता है।
हैरानी की बात यह है कि विद्यालय प्रशासन अपनी गलती मानने के बजाय इसे ‘मदद’ का नाम दे रहा है। मध्य विद्यालय सिलफरी शिक्षिका नीलप्रभा इनका कहना है कि बच्चों से खाना नहीं बनवाया जा रहा था, बल्कि केवल “सहायता” ली जा रही थी। भठौली की शिक्षिका का तर्क था कि ब्रेक के दौरान बच्चों को केवल कुछ काम के लिए बुलाया गया था।

