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Home»World»ट्रंप की अधूरी हसरत: खामेनेई की मौत के बाद भी ईरान में नहीं हुआ विद्रोह
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ट्रंप की अधूरी हसरत: खामेनेई की मौत के बाद भी ईरान में नहीं हुआ विद्रोह

शीर्ष नेतृत्व के सफाए के बावजूद ईरान में अमेरिकी उम्मीदों के विपरीत कोई बड़ा विद्रोह नहीं। जवाबी हमलों में 3 अमेरिकी सैनिक मारे गए; डोनाल्ड ट्रंप ने जंग खिंचने के दिए संकेत।
एडिटरBy एडिटरMarch 2, 20262 Mins Read
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Tehran, (Iran): 28 फरवरी 2026 को हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के जरिए अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई सहित देश के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने का दावा किया। लेकिन इस हमले के 48 घंटे बाद भी व्हाइट हाउस के लिए खुशखबरी कम और चिंताएं ज्यादा हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह सपना, जिसमें ईरानी जनता सड़कों पर उतरकर इस्लामिक शासन को उखाड़ फेंकती, फिलहाल अधूरा है।

Read more: खामेनेई की मौत से कांपा ईरान, बदलता मिडिल ईस्ट

रिजीम चेंज की हसरत और कड़वी हकीकत— अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य केवल खामेनेई का खात्मा नहीं था, बल्कि ईरान में एक ऐसी सत्ता स्थापित करना था जो वाशिंगटन के अनुकूल हो और परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद कर दे। ट्रंप प्रशासन को अंदेशा था कि नेतृत्व विहीन होते ही ईरान ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा, लेकिन ईरान की बहुसंख्यक आबादी और सैन्य बल (IRGC) वर्तमान व्यवस्था के साथ और मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं।

पलटवार से सहमा अमेरिका: 3 सैनिकों की मौत— ईरान ने इस हमले का न केवल कड़ा प्रतिरोध किया है, बल्कि मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण मिसाइल वर्षा की है।

  • अमेरिकी हताहत: इन जवाबी हमलों में 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है।

  • रणनीतिक नुकसान: क्षेत्र में कई अमेरिकी एयरबेस को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

  • युद्ध की अवधि: ट्रंप, जिन्होंने इस अभियान के 4 दिनों में खत्म होने का दावा किया था, अब इसके 4 हफ्ते तक खिंचने की बात कह रहे हैं। यह स्वीकारोक्ति बताती है कि ईरान का प्रतिरोध उम्मीद से कहीं अधिक संगठित है।

ईरान का कमांड स्ट्रक्चर बरकरार— विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई समर्थकों ने तुरंत स्थिति को संभाल लिया है और बदले की कसम खाई है। ईरान ने अपनी परमाणु और सैन्य संपत्तियों को सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट कर दिया है। ट्रंप के लिए चुनौती यह है कि अगर जनता का विद्रोह नहीं होता, तो अमेरिका को एक लंबे और थका देने वाले युद्ध (War of Attrition) में उलझना पड़ सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और उनकी अपनी राजनीति के लिए जोखिम भरा होगा।

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