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Bishnupur (Gumla): जहां बच्चों के हाथों में कलम-किताब होनी चाहिए, वहां उन्हें झाड़ू थमाकर ऊंची छत पर चढ़ा देना—यह दृश्य राजकीय मध्य विद्यालय, बिशुनपुर से सामने आया है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि नाबालिग छात्र स्कूल की ऊंची छत पर चढ़कर झाड़ू से सफाई कर रहे हैं। जरा सी चूक किसी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती थी।
बिशुनपुर स्कूल में मासूमों से कराई गई छत की सफाई
यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ माना जा रहा है। ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई अनहोनी हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या स्कूल के प्रधानाचार्य अपने बच्चों को भी इसी तरह खतरे में डालते?
बाल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
जिला परिषद सदस्य पवन उरांव ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि बच्चों से इस प्रकार का काम कराना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने गुमला के उपायुक्त से मांग की है कि मामले में सख्त कार्रवाई की जाए ताकि जिले के अन्य स्कूलों के लिए यह एक नजीर बने।
वहीं शिक्षा विभाग के बीपीओ नीरज सिंह ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। बच्चों से इस तरह का काम कराना पूरी तरह गलत है। मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—
क्या सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा की कोई जवाबदेही नहीं?
क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
क्या ऐसे प्रधानाचार्य को एक दिन भी पद पर बने रहने का अधिकार है?
शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय में यदि बच्चों को ही खतरे में डाला जाएगा, तो व्यवस्था पर से विश्वास उठना स्वाभाविक है। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस शैक्षिक अत्याचार पर कितनी तेजी और कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।
— प्रदीप कुमार साहू की रिपोर्ट

