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Islamabad (Pakistani): पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है। पिछले कुछ घंटों में यहाँ जो खूनी खेल शुरू हुआ है, उसने दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। विद्रोही संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और पाकिस्तानी सेना के बीच छिड़ी इस सीधी जंग में अब तक 145 विद्रोहियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। लेकिन इस खूनी संघर्ष की कीमत आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को भी चुकानी पड़ी है; 17 जवान और महिलाओं-बच्चों समेत 18 बेगुनाह नागरिकों की भी मौत हो चुकी है।
इतिहास का सबसे बड़ा सैन्य ऑपरेशन
मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने पुष्टि की है कि पिछले 40 घंटों से जारी आतंकवाद विरोधी अभियान में प्रशासन ने 145 विद्रोहियों के शव अपने कब्जे में लिए हैं। क्वेटा, ग्वादर और नुश्की जैसे एक दर्जन इलाकों में विद्रोहियों ने न सिर्फ सुरक्षा ठिकानों बल्कि जेलों और सरकारी दफ्तरों को भी निशाना बनाया। सेना का दावा है कि क्वेटा पर बड़े हमले की साजिश को नाकाम करते हुए अकेले वहां 92 आतंकियों को ढेर किया गया है, जिनमें तीन आत्मघाती हमलावर भी शामिल थे।
दहशत में डूबे लोग, कटी दुनिया से संपर्क
जमीनी हालात इतने भयावह हैं कि पूरे प्रांत में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। रेल और सड़क यातायात ठप होने से बलूचिस्तान का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट चुका है। क्वेटा की सड़कों पर पसरा सन्नाटा वहां के नागरिकों के खौफ की गवाही दे रहा है। स्थानीय निवासी हमदुल्लाह कहते हैं, “अब घर से निकलना मौत को गले लगाने जैसा है।”
भारत पर आरोप और करारा जवाब
हमेशा की तरह अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पाकिस्तान ने इस हिंसा के पीछे भारत का हाथ बताया है। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पाकिस्तान का पुराना पैंतरा करार दिया है। भारत ने दोटूक कहा कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक विफलताओं और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर ध्यान देना चाहिए, न कि पड़ोसी देशों पर बेबुनियाद आरोप लगाकर दुनिया का ध्यान भटकाना चाहिए।
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