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Manali: अगर आप पहाड़ों की अनछुई खूबसूरती और शांति के शौकीन हैं, तो हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में स्थित चंद्रताल झील आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। समुद्र तल से करीब 14,100 फीट की ऊंचाई पर बसी यह झील अपने अर्धचंद्राकार आकार और अलौकिक सुंदरता के कारण दुनिया भर के घुमक्कड़ों को अपनी ओर खींचती है।
कुदरत का जादू: पल-पल बदलता पानी का रंग
चंद्रताल की सबसे जादुई बात इसका रंग बदलता पानी है। हिमनदों (Glaciers) से आने वाले खनिज और सूरज की रोशनी का कमाल कुछ ऐसा होता है कि:
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सुबह: पानी हल्का नीला नजर आता है।
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दोपहर: तेज धूप में यह चमकीले फिरोजा (Turquoise) रंग का हो जाता है।
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शाम: ढलते सूरज के साथ पानी गहरा हरा दिखने लगता है।
पौराणिक कथाओं से गहरा नाता: युधिष्ठिर के स्वर्ग गमन की साक्षी
स्थानीय लोग इस झील को देवताओं का निवास मानते हैं। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, महाभारत काल में युधिष्ठिर को इसी स्थान से इंद्र देव अपने रथ में बिठाकर स्वर्ग ले गए थे। एक अन्य लोककथा के अनुसार, पूर्णिमा की रात यहां चंद्र देव और एक अप्सरा का मिलन होता है, जिससे झील की आभा और भी रहस्यमयी हो जाती है।
रोमांच से भरा है सफर: बटाल से झील तक की चुनौती
चंद्रताल पहुंचना किसी साहसिक अभियान से कम नहीं है। मनाली से अटल सुरंग और ग्रामफू होते हुए बटाल तक का रास्ता हिमालय की असली चुनौती पेश करता है। बटाल से झील की पार्किंग तक का 14 किलोमीटर का रास्ता बेहद कच्चा और कठिन है, जहां केवल मजबूत ‘फोर-व्हील ड्राइव’ वाहन ही पहुंच पाते हैं। इसके बाद का पैदल सफर आपको एक ऐसी दुनिया में ले जाता है जहां समय मानो ठहर सा गया हो।
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यह एक संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र है, इसलिए यहां स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। जून से सितंबर के बीच यहां जाना सबसे उपयुक्त माना जाता है।

