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Astrology News: सनातन धर्म में माघ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। इस दिन को तिलकुंद चतुर्थी, गणेश जयंती, माघी गणेश चतुर्थी और वरद चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था, इसलिए यह दिन गणपति भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है।
गणेश जयंती 2026 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल चतुर्थी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 47 मिनट से होगी। वहीं, इसका समापन 23 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 28 मिनट पर होगा। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष गणेश जयंती और तिलकुंद चतुर्थी का पर्व 22 जनवरी 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा।
तिलकुंद चतुर्थी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं। गणपति को बुद्धि, विवेक और शुभता का प्रतीक माना गया है। तिलकुंद चतुर्थी के दिन किया गया व्रत संतान सुख, कार्य सफलता और मानसिक शांति प्रदान करता है। यही कारण है कि इस दिन श्रद्धालु विशेष श्रद्धा के साथ बप्पा की आराधना करते हैं।
गणेश जयंती पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करने का विधान है। इसके बाद भगवान गणेश के समक्ष व्रत का संकल्प लिया जाता है।
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एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। फिर गणपति को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराया जाता है। पूजा के दौरान उन्हें सिंदूर का तिलक लगाया जाता है, क्योंकि गणेश जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है।
पूजा में 21 दूर्वा की गांठें और लाल फूल अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इन विधियों से प्रसन्न होकर भगवान गणेश अपने भक्तों को मनचाहा वरदान देते हैं और जीवन से सभी बाधाओं को दूर करते हैं।

