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Health News: भारतीय आयुर्वेद परंपरा में कई ऐसी औषधियां हैं जो आधुनिक दवाओं पर भारी पड़ती हैं। इन्हीं में से एक है शतावरी, जिसे ‘सौ रोगों को दूर करने वाली’ जड़ी-बूटी माना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में इसे सतावर या सतामूली के नाम से भी पुकारा जाता है। यह औषधीय पौधा अपनी जड़ों में संचित गुणों के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जो मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को फौलादी बनाने की ताकत रखता है।
शतावरी की तासीर ठंडी और स्वाद मधुर होता है, जिसके कारण यह शरीर की आंतरिक गर्मी और रूखेपन को शांत कर प्राकृतिक नमी बनाए रखती है।
माताओं के लिए संजीवनी और पुरुषों के लिए शक्तिशाली टॉनिक
शतावरी को विशेष रूप से स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए वरदान माना गया है। डिलीवरी के बाद यदि शिशु के लिए पर्याप्त दूध नहीं बन रहा हो, तो रात में दूध के साथ शतावरी पाउडर का सेवन दूध की मात्रा बढ़ाने में चमत्कारी परिणाम देता है। साथ ही, यह महिलाओं में पीरियड्स की अनियमितता और हार्मोनल असंतुलन को भी ठीक करती है।
सिर्फ महिलाएं ही नहीं, पुरुषों के लिए भी शतावरी एक प्रभावी टॉनिक है। शारीरिक कमजोरी, शुक्राणु की कमी या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में इसे अश्वगंधा और कौंच बीज के साथ मिलाकर लेने की सलाह दी जाती है। इससे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा, यूरिन इन्फेक्शन और पेशाब में जलन जैसी समस्याओं में भी शतावरी का शीतल गुण तुरंत राहत पहुंचाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह खाली पेट दूध के साथ इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए सबसे उत्तम है।

