अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
Ranchi News: झारखंड में इन दिनों झामुमो (JMM) के नेतृत्व वाली महागठबंधन की सरकार बिना किसी औपचारिक समन्वय समिति (को-ऑर्डिनेशन कमेटी) के चल रही है। सत्ताधारी गठबंधन में जेएमएम, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) शामिल हैं, जबकि सीपीआई माले बाहर से समर्थन दे रहा है। चार प्रमुख दलों के सहयोग से चल रही इस सरकार में समन्वय स्थापित करने वाली अहम समिति का कार्यकाल नवंबर महीने में ही समाप्त हो चुका है।
समन्वय समिति का कार्यकाल खत्म, सोरेन सरकार पर सहयोगी दलों का दबाव!
समन्वय समिति की गैर-मौजूदगी को देखते हुए, सत्ता में शामिल प्रमुख दलों JMM, RJD और कांग्रेस ने इसे जल्द से जल्द पुनर्गठित करने की आवश्यकता जताई है। सभी को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन जल्द ही सभी सहयोगी दलों के साथ बैठक करके नई को-ऑर्डिनेशन कमेटी का गठन करेंगे।
विधानसभा सत्र के बाद पुनर्गठन की उम्मीद: कांग्रेस
झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, जो पिछली समन्वय समिति के भी सदस्य थे, ने इस कमेटी को बेहद जरूरी बताया है। उनका कहना है कि यह समिति सुनिश्चित करती है कि सरकार गठबंधन के सभी दलों के चुनावी घोषणापत्रों के अनुरूप चले और आपसी समन्वय बना रहे।
केशव महतो कमलेश ने यह खुलासा किया कि कमेटी के पुनर्गठन को लेकर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू की महागठबंधन के नेता हेमंत सोरेन से बात हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के समाप्त होते ही यह महत्वपूर्ण समन्वय समिति पुनर्गठित कर ली जाएगी। यह दर्शाता है कि सहयोगी दलों की ओर से कमेटी के गठन के लिए कहीं न कहीं दबाव बना हुआ है।
राजद के प्रदेश सचिव रामकुमार यादव ने भी इस बात पर जोर दिया कि को-ऑर्डिनेशन कमेटी की भूमिका तब बड़ी और बेहद कारगर हो जाती है, जब अलग-अलग दलों के बीच किसी नीतिगत मुद्दे पर आम सहमति या समन्वय स्थापित करने की जरूरत होती है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि पूर्व की कमेटी में बैठकों की कमी क्यों रही, यह एक अलग मुद्दा है, लेकिन कमेटी का होना बेहद जरूरी है।
फैसला हेमंत सोरेन के पाले में: जेएमएम
वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने भी समन्वय समिति की आवश्यकता को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि JMM भी मानती है कि गठबंधन सरकार में विभिन्न मुद्दों पर समन्वय स्थापित करने के लिए यह समिति महत्वपूर्ण है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि समन्वय समिति कब गठित होगी, इसका अंतिम फैसला उनके नेता हेमंत सोरेन को ही लेना है। मनोज पांडेय ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री जल्द ही सभी सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक करेंगे और उसके बाद नई समन्वय समिति का गठन किया जाएगा।
यहां यह याद रखना जरूरी है कि 2019 में सत्ता में वापसी के बाद, यह हाई लेवल को-ऑर्डिनेशन कमेटी काफी समय बाद 2022 में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अध्यक्षता में गठित की गई थी। उस कमेटी में गुरुजी के अलावा कांग्रेस और JMM के कई बड़े नेता शामिल थे, लेकिन यह और बात है कि पिछले कार्यकाल में इस समिति की बैठकें गिनती की ही हुईं और यह कोई खास या उल्लेखनीय भूमिका नहीं निभा पाई। अब देखना यह होगा कि नई कमेटी कब तक गठित होती है और इस बार वह कितनी प्रभावी साबित होती है।

