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बिहार चुनाव में महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर चल रहा नाटक- लालू ने वफादारों को बांटे चुनाव चिन्ह, तेजस्वी ने आधी रात को लिए वापस
Patna News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन के प्रमुख दलों—राजद और कांग्रेस—के बीच सीट बंटवारे पर गतिरोध गहराता जा रहा है। दिल्ली में तेजस्वी यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई बैठक बिना किसी समाधान के खत्म हो गई। दोनों पक्ष अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जिससे चुनावी तैयारियों में बाधा आ रही है।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने बिहार नेताओं को “कड़ी मोलभाव” के निर्देश दिए हैं, जबकि तेजस्वी अपनी पार्टी की सीट मांग पर कायम हैं। महागठबंधन अभी तक सीट फॉर्मूला तय नहीं कर पाया है, जबकि चुनाव आयोग ने दूसरे चरण की अधिसूचना जारी कर दी है और पहले चरण के लिए नामांकन में अब कुछ ही दिन बाकी हैं।
लालू यादव ने बांटे सिंबल, तेजस्वी ने वापस ले लिए
सोमवार को राबड़ी देवी के पटना आवास पर आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने कई वफादार नेताओं को पार्टी का चुनाव चिन्ह सौंपा। इस दौरान परबत्ता से सुनील सिंह, मटिहानी के पूर्व विधायक नरेंद्र कुमार सिंह ‘बोगो’, मधेपुरा से चंद्रशेखर यादव, कांटी से इसराइल मंसूरी और भाई वीरेंद्र जैसे मौजूदा विधायक भी पार्टी चिन्ह के साथ बाहर निकलते नजर आए।
इस घटना ने 2024 के लोकसभा चुनावों की याद दिला दी, जब लालू ने गठबंधन की मंजूरी के बिना टिकट वितरण कर दिया था। लेकिन पटना लौटने के बाद तेजस्वी यादव ने इन उम्मीदवारों को आधी रात वापस बुलाकर उनके चुनाव चिन्ह लौटाने को कहा। सूत्र बताते हैं कि यह कदम सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए उठाया गया।
कांग्रेस की नाराजगी
कांग्रेस ने आरजेडी के इस कदम पर नाराजगी जताई और तेजस्वी को स्पष्ट संदेश दिया कि बिना सहमति टिकट वितरण से गठबंधन में अविश्वास पैदा होगा। कांग्रेस अभी तक अपने उम्मीदवारों की सूची और चुनाव चिन्ह की घोषणा नहीं कर पाई है, जबकि वह सीट संख्या में बढ़ोतरी की मांग कर रही है।
सोमवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल और बिहार के नेताओं ने बैठक कर विवादित सीटों पर खड़गे के हस्तक्षेप का आग्रह किया। खड़गे ने सलाह दी कि राज्य के नेता सीधे तेजस्वी से बात कर मंगलवार तक समाधान निकालें।
चुनावी समीकरण और समय का दबाव
दूसरे चरण की अधिसूचना के साथ 122 सीटों के लिए नामांकन शुरू हो चुका है। पहले चरण के लिए नामांकन की डेडलाइन नजदीक है और महागठबंधन की सुस्त रणनीति इसका नुकसान कर सकती है। सीटों पर सहमति न बनने से प्रत्याशियों की तैयारी प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टिकट वितरण में देरी और अचानक वापसी से आरजेडी-कांग्रेस के बीच विश्वास का संकट पैदा हो सकता है, जो चुनावी परिणामों पर असर डाल सकता है। यह विवाद साफ संकेत देता है कि 2025 का चुनाव केवल एनडीए बनाम महागठबंधन की लड़ाई नहीं होगा, बल्कि गठबंधन की आंतरिक मजबूती भी परिणाम तय करेगी।

