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India News: सफर के दौरान ट्रेन टिकट खो जाने पर भी रेलवे यात्रियों के हादसे में मुआवजा देने से इनकार नहीं कर सकता। यह ऐतिहासिक फैसला सुप्रीम कोर्ट की बेंच—जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया—ने सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि रेलवे अब यात्रियों को राहत देने के बजाय तकनीकी खामियां बताकर दावे खारिज नहीं कर सकता।
रेलवे तकनीकी बहाने से मुआवजा नहीं टाल सकता
फैसले के मुताबिक, यदि किसी यात्री के पास वैध टिकट की तारीख और रूट का अन्य प्रमाण है, तो मुआवजे के दावे को स्वीकार करना जरूरी होगा। टिकट का भौतिक सबूत या पुलिस मेमो न होना दावे को खारिज करने का आधार नहीं बन सकता, जब अन्य परिस्थितियां यात्रा की पुष्टि करती हों। कोर्ट ने रेल अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि मुआवजा देने का अधिकार यात्रियों के लिए वास्तविक और सुलभ होना चाहिए।
यह आदेश रेल दुर्घटनाओं या अन्य अप्रिय घटनाओं में मृत्यु या चोट के मामलों में रेलवे की जिम्मेदारी को स्पष्ट करता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी भविष्य के ट्रिब्यूनल व हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वे इस फैसले को लागू करें।
मामला मध्य प्रदेश के संजेश कुमार याज्ञनिक की पत्नी और बेटे की अपील से जुड़ा है, जिनकी 2017 में रणथंभौर एक्सप्रेस से गिरकर मौत हो गई थी। परिवार ने रेलवे से 12 लाख रुपए मुआवजे का दावा किया पर टिकट न मिलने के कारण ट्रिब्यूनल व हाई कोर्ट ने दावा खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने परिवार के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया और कहा कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और न्याय को प्राथमिकता दे।
यह निर्णय कल्याणकारी कानून की भावना को प्राथमिकता देता है और यात्री हितों को संरक्षित करता है। अब भविष्य में रेल हादसों में, यात्री मुआवजे के मामले में अधिक सुरक्षित और अधिकार संपन्न होंगे।

