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Garhwa News: आगामी चिकित्सा सुरक्षा और मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए गढ़वा जिला में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु एसडीएम संजय कुमार ने एक औचक निरीक्षण अभियान चलाया। 27 सितंबर को चिरोंजिया और नवादा मोड़ क्षेत्र के चार निजी अस्पतालों — गढ़वा सेवा सदन, मेडिका हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, जीएन हॉस्पिटल तथा डॉ. जे. अंसारी के क्लीनिक — पर निरीक्षण किया गया। इस दौरान कई गंभीर विसंगतियां उजागर हुईं, जिसके कारण डॉ. जे. अंसारी के क्लीनिक को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
डॉ. जे. अंसारी के क्लीनिक पर मिली गंभीर अनियमितताओं में सबसे प्रमुख था चिकित्सक की संदिग्ध डिग्री। क्लीनिक के बोर्ड पर “एमबीबीएस” लिखा था, जिसका स्थानीय लोगों ने फर्जी होने का आरोप लगाया। बोर्ड पर “जनरल फिजीशियन, हड्डी एवं नस रोग विशेषज्ञ” के दावे भी किए गए थे। जांच के दौरान डॉ. अंसारी अनुपस्थित थे, लेकिन तकनीशियन मुकेश कुमार मरीजों को इलाज करते पाए गए, जो अभी किसी स्थानीय डिग्री कॉलेज में अध्ययनरत हैं। इसके अलावा, क्लीनिक के मेडिकल स्टोर में इंजेक्शन, यूज्ड सिरिंज जैसी चिकित्सा सामग्री मिली, जिसके लिए वैध लाइसेंस नहीं था।
अन्य अस्पतालों में भी गड़बड़ियां पाई गईं। जीएन हॉस्पिटल में डॉ. जावेद होम्योपैथिक डॉक्टर होने का दावा करते हैं, लेकिन अस्पताल में एलोपैथिक दवाओं का उपयोग हो रहा था, जो नियमों के खिलाफ है। मेडिका हॉस्पिटल का एडमिशन रजिस्टर अपडेट नहीं था, जबकि मरीजों की संख्या बड़ी थी। गढ़वा सेवा सदन में भी जेनेरिक डेटा की कमी देखी गई। चारों अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट निस्तारण की कोई मान्य व्यवस्था नहीं पाई गई।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि अधिकांश अस्पतालों में गर्भाशय और डिलीवरी ऑपरेशन की संख्या असामान्य रूप से अधिक है, जिसे संदिग्ध सिंडिकेट का हिस्सा माना जा रहा है। इसके लिए भी अलग से गहन जांच की जाएगी।
एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही, धोखाधड़ी अस्वीकार्य है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि गढ़वा की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर और पारदर्शी बन सके। सभी अस्पतालों के संबंध में सिविल सर्जन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जा रही है।

