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India News: उत्तराखंड में ऑपरेशन कालनेमि के तहत फर्जीवाड़ा करने वालों को लगातार दबोचा जा रहा है। इसमें प्रेमजाल में युवतियों को फंसाने वालें हों या फिर फर्जी डॉक्टर और भ्रष्टाचार में डूबे अफसरों पर ताबड़तोड़ एक्शन लिया जा रहा है। ऑपरेशन कालनेमि के तहत अब तक 1182 लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। इसमें 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने इस अभियान में 5500 से अधिक लोगों का सत्यापन किया। इस अभियान में जम्मू का इफरान पकड़ा गया, जो दून में युवतियों को प्रेम जाल में फंसाता था, जबकि अलग-अलग जिलों में फर्जी डॉक्टर और आईएएस का भी खुलासा हुआ। रविवार को उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता नीलेश आनंद भरणे ने सरदार पटेल भवन में प्रेस वार्ता में जानकारी दी।उन्होंने बताया कि हरिद्वार जिले में सबसे अधिक 2704 लोगों का सत्यापन हुआ। वहां तीन आरोपी मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किए गए।
देहरादून जिले में 922 लोगों का सत्यापन हुआ। पांच आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया। टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा और नैनीताल समेत अन्य जिलों में भी कार्रवाई हुई। आईजी भरणे ने कहा कि ऑपरेशन कालनेमि का संदेश है कि देवभूमि की आस्था और संस्कृति के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। सेलाकुई में एक बांग्लादेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के सहारे बंगाली डॉक्टर बनकर रह रहा था। उसके पास आधार, पैन और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए। अनंतनाग (जम्मू) का युवक इफराज अहमद युवतियों को धर्म और पहचान छिपाकर प्रेम जाल में फंसा रहा था।
युवती की शिकायत के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया। वहीं उत्तर प्रदेश में हुई धर्मांतरण की कार्रवाई के तार देहरादून तक जुड़े। प्रेमनगर और रानीपोखरी थानों में एक-एक मुकदमा दर्ज किया गया। कई आरोपियों को यूपी वारंट पर लाया जाएगा और दुबई में बैठे आरोपी के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया। इधर,टिहरी गढ़वाल के कैम्पटी में निर्माणाधीन गेस्ट हाउस का नक्शा पास कराने के नाम पर ₹2.55 लाख की साइबर ठगी करने वाला शख्स प्रयागराज से गिरफ्तार। आरोपी ने खुद को आईएएस बताया था। इसी तरह सहसपुर क्षेत्र में ‘शनि दान बाबा’ का वेश धारण कर छिपा बांग्लादेशी नागरिक पुलिस ने पकड़ा।
कौन था कालनेमि?
कालनेमि रामायण में एक राक्षस था जिसे रावण ने हनुमान जी का रास्ता रोकने के लिए साधु के भेष में बिठा दिया था। रामायण के मुताबिक, जब युद्ध के दौरान मेघनाथ के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए और तो उनके उपचार के लिए सुशैण वैध ने संजीवनी बूटी लाने के लिए कहा। जिसे लेने के लिए हनुमान जी पवन वेग से जा रहे थे तभी कालनेमि साधु के भेष में राम नाम का संकीर्तन करने लगा और हनुमान जी को विश्राम करने के लिए कहने लगा। हनुमान जी वहां पर रुके और सरोवर में स्नान करने गए, जल में स्नान करते समय उनका सामना एक मगरमच्छ से हुए जिसका वध करने बाद उन्हें पता चला है कि ये जो साधु के भेष में बैठा वो रावण का भेजा हुआ राक्षस कालनेमि है। जिसके बाद हनुमान जी ने उसका वध करके उसे मुक्ति दी।

