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चैनपुर : बरवेमैदान की फिज़ा रविवार को आदिवासी संस्कृति और जोश से सराबोर हो गई। आदिवासी एकता मंच द्वारा आयोजित ‘आदिवासी दिवस सह मिलन समारोह’ में हजारों की भीड़ उमड़ी और पूरे मैदान में “जल-जंगल-जमीन हमारा है, हमारी पहचान हमारा अधिकार” जैसे नारे गूंज उठे। समारोह का आगाज़ स्व. दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके बाद दूर-दराज़ गांवों से आए खोड़ा दलों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमकर ऐसा नृत्य प्रस्तुत किया कि हर कोई थिरकने को मजबूर हो गया। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे-धजे कलाकारों ने आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक पेश की।
ज़िला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने उत्साहित भीड़ को संबोधित करते हुए कहा:-
“हम जल-जंगल-जमीन के लोग हैं। यह हमारी पहचान है, हमारी ताक़त है। हमारे पूर्वजों ने इसकी रक्षा के लिए बलिदान दिए हैं। आज कुछ ताक़तें हमें बांटना चाहती हैं, लेकिन जब तक हम एक रहेंगे, कोई हमें तोड़ नहीं सकता।”
पूर्व प्रमुख अनूप संजय टोप्पो ने भी भावुक अंदाज़ में कहा:-
“समय आ गया है कि हम अपने हक़ और संस्कृति की रक्षा के लिए संगठित हों। एकता ही हमारी असली शक्ति है।” भीड़ ने दिखाया उत्साह
हज़ारों की तादाद में मौजूद आदिवासी समाज के लोग, जेएसएलपीएस की दीदियां और पंचायत प्रतिनिधियों ने तालियों और नारों से नेताओं की बातों का समर्थन किया। पूरा मैदान एकजुटता और गर्व से लबरेज़ दिखा।
संस्कृति और संकल्प का संगम
यह आयोजन महज़ एक समारोह नहीं था, बल्कि आदिवासी समाज की ताक़त, उनकी संस्कृति और अधिकारों की लड़ाई का ऐलान था। बरवेमैदान की मिट्टी गवाही दे रही थी कि जब आदिवासी एक होते हैं तो उनकी आवाज़ दूर तक गूंजती है।


