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India News: तापी जिले के उकाई के पाथरडा गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें पीपला नदी पर पुल न होने के कारण एक शव को अंतिम संस्कार के लिए रस्सी और लकड़ी के सहारे नदी पार कर ले जाना पड़ा। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आदिवासी लोग अपनी जान जोखिम में डालकर शव के साथ नदी पार करते दिख रहे हैं। इस घटना ने सरकार के वादों और ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक तापी जिले के पाथरडा गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद, शव को अंतिम संस्कार के लिए नदी के दूसरे किनारे ले जाना था। लेकिन पीपला नदी पर पुल न होने के कारण, ग्रामीणों को रस्सियों और लकड़ियों के सहारे शव को नदी पार ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस प्रक्रिया के दौरान, आदिवासी बुजुर्गों और अन्य लोगों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी।
ये दृश्य एक वीडियो में रिकॉर्ड किए गए हैं जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है| यह वीडियो ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमी को उजागर करता है। आज़ादी के इतने सालों बाद भी गुजरात के गाँवों तक विकास नहीं पहुँचा है। यह घटना इसे बखूबी दर्शाती है। दूसरी ओर पूरे देश में गुजरात मॉडल की धूम मची हुई है। लेकिन गुजरात मॉडल में ही ऐसी सुविधाओं का अभाव है कि लोगों को छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए भी अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
पाथरडा समेत आसपास के गाँवों के निवासियों ने इस घटना के बाद सरकार की उदासीनता पर रोष व्यक्त किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पीपला नदी पर पुल की मांग वर्षों से चली आ रही है, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील समय में भी आदिवासी समुदाय को ऐसी कठिनाइयों का सामना करना दुखद है|

