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Health News: पेट का कैंसर अब तेजी से युवाओं में भी देखा जा रहा है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और तनाव से भरी दिनचर्या इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। पहले यह बीमारी ज्यादातर मध्य आयु या बुजुर्गों में पाई जाती थी, लेकिन अब 20 से 40 साल की उम्र के युवाओं में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं तो इस गंभीर बीमारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के गैस्ट्रोएंटीरियोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने हाल ही में एक वीडियो जारी कर पेट के कैंसर से बचाव के लिए कुछ बेहद आसान उपाय बताए। उनके अनुसार खानपान में छोटे-छोटे बदलाव भी बड़ी बीमारियों से बचाव में मदद कर सकते हैं।
क्रूसिफेरस सब्जियों का महत्व
डॉ. सेठी के अनुसार, पेट के कैंसर से बचने का सबसे आसान और असरदार तरीका है अपनी डाइट में क्रूसिफेरस सब्जियों को शामिल करना। इनमें ब्रोकली, फूलगोभी, पत्तागोभी और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसी सब्जियां आती हैं। इन सब्जियों में सल्फोराफेन नामक पावरफुल कंपाउंड पाया जाता है, जो शरीर में ऐसे एंजाइम्स को सक्रिय करता है जो कैंसर पैदा करने वाले एजेंट्स को बेअसर बना देते हैं। इससे कोशिकाओं को नुकसान से बचाया जा सकता है और पेट के कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।
लहसुन के फायदे
इसके अलावा उन्होंने लहसुन को डाइट का जरूरी हिस्सा बनाने की सलाह दी। लहसुन में मौजूद एलिसिन कंपाउंड को कई शोधों में कैंसर रोधी गुणों वाला बताया गया है। यह न केवल कैंसर सेल्स के विकास को धीमा करता है बल्कि उन्हें खत्म करने में भी मदद कर सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लहसुन को कच्चा या हल्का पकाकर खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।
प्रोसेस्ड मीट से परहेज
डॉ. सेठी ने खासकर युवाओं को चेतावनी दी है कि वे प्रोसेस्ड मीट का सेवन बंद करें। सॉसेज, बेकन, सलामी और हैम जैसे खाद्य पदार्थों में नाइट्रेट्स और नाइट्राइट्स पाए जाते हैं। ये पेट के अंदर जाकर कार्सिनोजेनिक कंपाउंड्स में बदल जाते हैं, जो कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने भी प्रोसेस्ड मीट को ग्रुप-1 कार्सिनोजन में शामिल किया है। इसका मतलब है कि इनका सेवन पेट के कैंसर का बड़ा कारण बन सकता है। बेहतर होगा कि लोग इसकी जगह ताजी मछली, अंडे, दाल, बीन्स और लीन मीट को डाइट में शामिल करें।
एच. पिलोरी बैक्टीरिया से सावधान
विशेषज्ञों ने पेट के कैंसर का एक और बड़ा कारण बताया है – एच. पिलोरी बैक्टीरिया। यह बैक्टीरिया लंबे समय तक पेट में रहकर जलन, अल्सर और अंततः कैंसर का कारण बन सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार अपच, पेट दर्द, भारीपन या बार-बार डकार आने जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर एच. पिलोरी का टेस्ट करवाना चाहिए। समय रहते यह टेस्ट करवाने से पेट के कैंसर का खतरा काफी हद तक घटाया जा सकता है।
युवाओं के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल के युवा फास्ट फूड, प्रोसेस्ड आइटम और असंतुलित जीवनशैली की वजह से इस बीमारी की ओर बढ़ रहे हैं। देर रात तक जागना, नींद की कमी, धूम्रपान और शराब भी पेट के कैंसर के खतरे को बढ़ा देते हैं। यही कारण है कि पहले जहां यह बीमारी बुजुर्गों तक सीमित थी, अब यह तेजी से युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है।

