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Khunti News: झारखंड की राजधानी रांची को खूंटी, गुमला और सिमडेगा के साथ-साथ ओडिशा और छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाली खूंटी-तोरपा-कोलेबिरा सड़क आज भय और खतरे की पहचान बन चुकी है। जून महीने की भारी बारिश ने इस सड़क की जीवनरेखा कहे जाने वाले पेलौल गांव के पास बनई नदी पर बने पुल को तोड़ दिया। पुल टूटने के बाद से लोगों को मजबूरी में वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है, लेकिन इन रास्तों की हालत भी इतनी खराब है कि सफर अब जान हथेली पर लेकर करने जैसा हो गया है।
तीन महीने बाद भी नहीं बना डायवर्सन
पुल टूटे तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन न तो डायवर्सन बनाया गया और न ही नए पुल के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। करीब एक महीने पहले डायवर्सन निर्माण के लिए 1.80 करोड़ रुपये की निविदा निकाली गई थी। खूंटी के विधायक रामसूर्या मुंडा ने भी दावा किया था कि निविदा की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और बारिश कम होते ही काम शुरू होगा। मगर हकीकत यह है कि अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।
टूटीं ग्रामीण सड़कें और बढ़ते हादसे
पुल टूटने के बाद भारी वाहनों का दबाव जुरदाग, गम्हारिया, अंगराबारी और अन्य ग्रामीण मार्गों पर बढ़ गया। इन सड़कों की हालत पहले ही कमजोर थी, और अब भारी ट्रकों के गुजरने से जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। सड़क के दोनों ओर फ्लैंक पूरी तरह टूट चुके हैं। चालक डर के कारण गाड़ियों को साइड से उतारने से भी कतराते हैं क्योंकि गाड़ियां फंसने का खतरा बना रहता है। अंगराबारी-तुपुदाना पथ पर बेड़ा पुल के पास मिट्टी का कटाव इतना ज्यादा हो गया है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
गम्हारिया गांव में सबसे गंभीर स्थिति
गम्हारिया गांव की हालत सबसे भयावह है। यहां सड़क के बीचोबीच करीब चार फीट गहरा और चौड़ा गड्ढा बन गया है। इस गड्ढे से गुजरते समय कई वाहनों का आधा हिस्सा धंस जाता है। घंटों मशक्कत के बाद वाहन को बाहर निकाला जाता है। ऊपर से नल-जल योजना की टूटी पाइपलाइन लगातार पानी रिसा रही है, जिससे गड्ढा और गहरा होता जा रहा है। यहां स्कूली बच्चों, महिलाओं और मवेशियों की जान हर समय खतरे में रहती है।
ग्रामीणों में भय और असुविधा
ग्रामीणों का कहना है कि अब उनका रोज का जीवन भय से घिर गया है। बच्चे स्कूल जाते समय हादसे के डर से सहमे रहते हैं। महिलाएं पानी भरने या बाजार जाने के दौरान हमेशा दुर्घटना की आशंका से परेशान रहती हैं। मवेशियों को चराने या ले जाने के दौरान भी यही स्थिति बनी रहती है।
प्रशासन और नेताओं पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर न तो विभागीय अधिकारी और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि गंभीर दिख रहे हैं। सब केवल बयानबाजी और वादों तक सीमित हैं। गम्हारिया के रामचंद्र स्वांसी का कहना है कि कम से कम प्रशासन बोल्डर और मोरम डालकर अस्थायी समाधान कर सकता है, लेकिन अब तक ऐसा भी नहीं किया गया। मणिका स्वांसी का कहना है कि नेता और अधिकारी इसी सड़क से गुजरते हैं, फिर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अगर जल्द सड़क और पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेंगे। इस संबंध में सांसद कालीचरण मुंडा और विधायक रामसूर्या मुंडा को ज्ञापन भी सौंपा गया है। लोगों का कहना है कि अब उनका सब्र टूट रहा है और हर गुजरते दिन के साथ यह सड़क जानलेवा बनती जा रही है।

