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Jharkhand News: नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों में आ गई है। सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट दिलीप मिश्रा ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार को हठधर्मिता छोड़कर रैयतों और किसानों के हित में ठोस कदम उठाना चाहिए।
मिश्रा ने कहा कि जब भी राज्य सरकार को विकास कार्यों के लिए जमीन की जरूरत हुई, आदिवासी मूलवासियों ने हमेशा सहयोग किया और स्वेच्छा से अपनी जमीन सौंपी। लेकिन आज तक कई प्रोजेक्ट सिर्फ कागजों में सिमटी हुई हैं। ऐसे में रैयतों की जमीन बेकार पड़ी है, जिस पर किसान अब भी खेती कर रहे हैं।
उन्होंने साफ कहा कि नियमों के अनुसार यदि अधिग्रहित जमीन पर 20 साल तक कोई विकास कार्य नहीं होता है, तो सरकार को जमीन रैयत को वापस करना अनिवार्य है। लेकिन इसके बावजूद अधिकारी भ्रष्टाचार और दबाव के जरिए किसानों की जमीन कब्जाने की कोशिश कर रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को रिम्स-2 प्रोजेक्ट को नगड़ी के बजाय खूंटी में शिफ्ट करना चाहिए। उनका तर्क है कि खूंटी में पहले से ही नॉलेज सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। वहाँ अधूरा ढांचा मौजूद है, जिसे उपयोग में लाकर आसानी से रिम्स-2 की शुरुआत की जा सकती है। इससे न तो किसानों को विस्थापित होना पड़ेगा और न ही नई जमीन अधिग्रहण की जरूरत होगी।

