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Home»India»ट्रांसजेंडर बच्चों को घर में रखें तो किन्नर समूह नहीं बनेंगे – महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी
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ट्रांसजेंडर बच्चों को घर में रखें तो किन्नर समूह नहीं बनेंगे – महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी

महामंडलेश्वर और किन्नर आचार्य डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने समाज पर सीधा प्रहार करते हुए कहा है कि जो लोग अपने ट्रांसजेंडर बच्चों को किन्नर बाड़े में छोड़ जाते हैं, वे ही किन्नर समूहों के बनने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि अगर परिवारों ने इन बच्चों को स्वीकार करना शुरू कर दिया तो किन्नर समूह खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएंगे। इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब के रूबरू कार्यक्रम में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने किन्नरों द्वारा बधाई लेने की प्रथा का भी जोरदार समर्थन किया।
By Samsul HaqueAugust 19, 20253 Mins Read
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India News: महामंडलेश्वर और किन्नर आचार्य डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने समाज पर सीधा प्रहार करते हुए कहा है कि जो लोग अपने ट्रांसजेंडर बच्चों को किन्नर बाड़े में छोड़ जाते हैं, वे ही किन्नर समूहों के बनने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि अगर परिवारों ने इन बच्चों को स्वीकार करना शुरू कर दिया तो किन्नर समूह खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएंगे। इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब के रूबरू कार्यक्रम में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने किन्नरों द्वारा बधाई लेने की प्रथा का भी जोरदार समर्थन किया।

समाज से सीधा सवाल : बच्चों को क्यों छोड़ते हैं?

डॉ. त्रिपाठी ने समाज की उस दोहरी मानसिकता पर सवाल उठाया, जहाँ लोग अपने मासूम ट्रांसजेंडर बच्चों को तो छोड़ जाते हैं, लेकिन बाद में किन्नरों की आजीविका के लिए पर्याप्त दानराशि नहीं देना चाहते। उन्होंने भावुक होकर कहा, जब वे बच्चे बड़े होकर किन्नर बनते हैं तो सोचिए समाज के लिए उनके मन में कैसी भावनाएं पनपती होंगी? उन्होंने इंदौर का उदाहरण देते हुए बताया कि यहाँ भी कई माता-पिता दूध पीते बच्चों को छोड़ गए, जिन्हें पाल-पोसकर और पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया गया।

शिक्षा और योग्यता के बावजूद भेदभाव जारी

उन्होंने कहा कि समाज के अन्य लोगों की तरह सभी किन्नर भी एक जैसे नहीं होते। कहीं-कहीं कोई घटनाएं घट जाती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सभी को एक ही नजर से देखा जाए। उन्होंने अपनी निजी कहानी साझा करते हुए बताया कि वे एक ब्राह्मण परिवार में पैदा हुईं, पढ़ी-लिखी और योग्य थीं, लेकिन फिर भी समाज ने उन्हें न तो समानता का हक दिया और न ही नौकरी। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, जो लोग किन्नरों को पर्याप्त बधाई राशि नहीं देते, उन्हें समझना चाहिए कि घोड़ा घास से दोस्ती करेगा तो खाएगा क्या?

सनातन धर्म की ओर झुकाव और सरकारी मांग

डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि आजकल अधिकांश किन्नर सनातन धर्म की राह पर चल पड़े हैं। उन्होंने कहा, सनातन धर्म में सम्मान है और स्वाभिमान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किन्नर शैव संप्रदाय के अधीन शिव के गण माने जाते हैं।
उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से तत्काल किन्नर कल्याण बोर्ड के गठन की मांग की। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर एक्ट को अनुमति दे दी है और संसद में भी यह पारित हो चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश में इस पर फैसला लंबित है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में यहां पर इस मुद्दे पर काम बहुत धीमा है।

किन्नर समुदाय को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास

किन्नर समुदाय को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों पर बात करते हुए डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि वे तपिश फाउंडेशन जैसे संगठनों के साथ मिलकर वेदांता, हिंदू, अपोलो, गोदरेज, पेप्सिको और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े समूहों में ट्रांसजेंडर लोगों को सम्मानजनक नौकरी दिला रही हैं।

सिंहस्थ में किन्नर अखाड़े के लिए ज़मीन मांगेंगे

आगामी उज्जैन सिंहस्थ के लिए उन्होंने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस बार किन्नर अखाड़े के लिए सरकार से स्थायी जमीन की मांग की जाएगी, ताकि वहाँ किन्नरों का आश्रम और अर्धनारीश्वर भगवान का विशाल मंदिर बनाया जा सके।

इस बातचीत की शुरुआत में, स्टेट प्रेस क्लब के सदस्यों प्रवीण खारीवाल, रवि चावला, अभिषेक बडजात्या, यशवर्धन सिंह और दीप्ति परमेश्वरी सिंह ने डॉ. त्रिपाठी का आत्मीय स्वागत किया। सम्मान के रूप में गोविन्द लाहोटी कुमार ने उनका एक कैरीकेचर और सोनाली यादव ने एक स्मृति चिन्ह प्रदान किया। इस पूरे कार्यक्रम में नंदलालपुरा, इंदौर की पांच अन्य किन्नर भी डॉ. त्रिपाठी के साथ मौजूद थीं।

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