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Bihar News: बिहार की राजनीति में एक बार फिर गरमागरमी देखने को मिली है। इस बार मामला एक वायरल ऑडियो क्लिप का है, जिसमें मनेर से राजद विधायक भाई वीरेंद्र और एक पंचायत सचिव के बीच तीखी बहस होती सुनाई दे रही है। मामला एक मतदाता के मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ा है, लेकिन बहस प्रोटोकॉल और संवाद के स्तर तक पहुंच गई।
“भाई वीरेंद्र को नहीं पहचानता?” से शुरू हुआ विवाद
विधायक भाई वीरेंद्र ने पंचायत सचिव को फोन किया और सीधे कहा कि उन्हें एक मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना है। लेकिन जब सचिव ने सामान्य रूप से जवाब दिया और विधायक को पहचानने में असमर्थता जताई, तो विवाद बढ़ गया। पंचायत सचिव भी जबर निकला और कह दिया कि “ आप टेढ़ी बतियाइएगा, तो हम भी टेढ़ी बतियाएंगे।” विधायक नाराज़ होकर बोले –
कहने लगे- “बोलिए? कौन बोल रहा है रे?” तो सचिव ने पूछा- “किनसे बात करना है आपको ?” इस पर विधायक बोले, “पंचायत सचिव से बात करना चाह रहा हूं’। “
सचिव बोला- “हां, पंचायत सचिव बोल रहा हूं। बोलिए।” इसके बाद का संवाद इस तरह बिगड़ता चला गया। भाई वीरेंद्र- “अरे….तो भाई वीरेंद्र को तुम नहीं पहचानता है। अ तुम कहेगा कि बोलिए? आंय” पंचायत सचिव- “अपना परिचय दीजिएगा तब ना।”
भाई वीरेंद्र- “अरे भाई वीरेंद्र का नाम परिचय देना पड़ता है। भाई वीरेंद्र मेरा नाम है। तुम नहीं जानता है भाई वीरेंद्र कौन है तुम्हारा? भाई वीरेंद्र मनेर का कौन है? नहीं जानते हो तुम?”
पंचायत सचिव- “नहीं। जानकारी रहता तो ऐसे थोड़े बतियाते।”
भाई वीरेंद्र- “कहां, इंग्लैंड का है तुम? मनेर का विधायक को नहीं जानता है तुम ?”
पंचायत सचिव- “हां विधायक जी बोलिए।”
भाई वीरेंद्र- “हां विधायक जी बोलिए?… फिर जूता से मारेंगे खींचकर। समझा। तुम टेप करो, चाहे जो करो। तुम कह रहा है विधायक जी बोलिए। प्रोटोकॉल का ख्याल नहीं रखेगा रे? प्रोटोकॉल का ख्याल नहीं रखेगा रे? हिन्दुस्तान जानता है और तुम कह रहा है कि भाई वीरेंद्र कौन है, नहीं जानते हैं। आंय। अरे बोलता काहे नहीं है ?”
पंचायत सचिव- “अरे तो बोलिए ना क्या बात है? प्रणाम करना चाहिए। प्रणाम विधायक जी। हां, बोलिए।”
भाई वीरेंद्र- “अरे ये रिंकी देवी का, रिंकी देवी के पति का बनना है, अविनाश कुमार का मृत्यु प्रमाण पत्र बनना है। बनवाइए।”
पंचायत सचिव- “आवेदन मेरे पास आया हुआ है उनका।”
भाई वीरेंद्र- “आवेदन गया हुआ है। कब का। 13 से ही। काम मत करो। कर्मचारी हो, कर्मचारी जैसन काम करो।”
पंचायत सचिव- “आप भी प्रेम से बतियाइएगा, तो प्रेम से बतियाएंगे। ठीक है ना? नहीं तो जहां जो करना होगा, करते रहिएगा। कोई ऐसा डर नहीं है हमको। ठीक है। सीधा बतियाइएगा तो सीधा बतियाएंगे। टेढ़ी बतियाइएगा, तो टेढ़ी बतियाएंगे। आपसे डरने वाला कोई नहीं है यहां।”
भाई वीरेंद्र- “आंय। अरे तुम इस तरह का भाषा बोलेगा रे?”
पंचायत सचिव- “हां! पहले आप ही ना उस भाषा में बोल रहे हैं। आप जनप्रतिनिधि हैं, तो आपको पहले प्रेम से बात करनी चाहिए, पूछना चाहिए कि आपके पास ये आवेदन….।
भाई वीरेंद्र- “अरे हम कहे कर्मचारी बोल रहे हैं, तो हां हम कर्मचारी बोल रहे हैं। हम भाई वीरेंद्र बोल रहे हैं। तो कौन भाई वीरेंद्र?”
पंचायत सचिव- “हम नहीं जानते थे कि यहां के विधायक जी का क्या नाम है।” भाई वीरेंद्र- “तुम नहीं जानता है विधायक जी का नाम?”
पंचायत सचिव- “हां नहीं जानते थे।”
भाई वीरेंद्र- “तुमको नौकरी करने का अधिकार नहीं है ना मनेर में, नहीं जानते हो तुम अपने जनप्रतिनिधि को?”
पंचायत सचिव- “जाके लिखित दे दीजिए। ट्रांसफर करा दीजिए।”
भाई वीरेंद्र- “ट्रांसफर नहीं। अब दूसरा बात हो जाएगा ना।”
पंचायत सचिव- “उतना धमकी मत दीजिए। उतना धमकी से कोई डरने नहीं जा रहा है। दूसरा बात हो जाएगा, क्या हो जाएगा ?”
भाई वीरेंद्र- “कहां का है रे तू?”
पंचायत सचिव- “अरे, काम का बात कीजिए ना। क्या काम है।”
भाई वीरेंद्र- “मैंने काम कहा ना।”
पंचायत सचिव- “वो प्रोसेस में गया हुआ है। बीएसओ सर के ऑफिस में आवेदन जाना है। वहां से जिला लॉग इन में जाएगा। वहां से फारवर्ड होकर आएगा अनुशंसित होकर हम लोग के लॉग इन में तब बनेगा।”
कथित तौर पर यह ऑडियो पंचायत सचिव और मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र की बातचीत का है। यह फोन कॉल नॉर्मल बातचीत से गाली-गलौज तक पहुंच गई। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। pic.twitter.com/Pisi4xxIst
— Shabnaz Khanam (@ShabnazKhanam) July 28, 2025
कथित तौर पर यह ऑडियो पंचायत सचिव और मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र की बातचीत का है। यह फोन कॉल नॉर्मल बातचीत से गाली-गलौज तक पहुंच गई। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
मामला सिर्फ बातचीत का नहीं, जनप्रतिनिधि बनाम सिस्टम की बहस
यह बहस सिर्फ एक ऑडियो क्लिप या व्यक्तिगत संवाद की नहीं है, बल्कि यह उस गहराई को दिखाती है जहां एक तरफ जनप्रतिनिधि अपने प्रभाव का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारी नियमों और अधिकार की बात करते हैं।
इस ऑडियो क्लिप से यह सवाल भी उठता है कि क्या लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि को हर नागरिक और कर्मचारी पहचानने का दायित्व है? क्या जनता की सेवा का अर्थ आदेश देना है या संवाद करना?
सोशल मीडिया पर बहस तेज, जनता बंटी हुई
ऑडियो क्लिप के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग विधायक की भाषा को लेकर नाराज हैं तो कुछ पंचायत सचिव के व्यवहार को अनुचित बता रहे हैं। जनता इस बात को लेकर भी चिंतित है कि सामान्य कार्यों के लिए भी आम लोगों को किस तरह की राजनीतिक दबाव या सरकारी ढांचे से जूझना पड़ता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का इंतजार
अब इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का भी इंतजार है। राजद का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उम्मीद है कि यह मुद्दा विधानसभा से लेकर पंचायत स्तर तक बहस का विषय बन सकता है।

