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World News: भारत के दक्षिण में हिंद महासागर में स्थित यह छोटा सा द्वीपीय देश आज मुस्लिम राष्ट्र के रूप में जाना जाता है, लेकिन कभी यह बौद्ध धर्म का बड़ा केंद्र हुआ करता था। आज यहां 98% से अधिक आबादी मुस्लिम है, लेकिन इतिहास के पन्ने बताते हैं कि करीब 900 साल पहले तक मालदीव बौद्ध संस्कृति और धर्म का मुख्य केंद्र था।
इतिहासकार मानते हैं कि बौद्ध धर्म की नींव यहां उस समय पड़ी जब भारत के उड़ीसा के राजा ब्रह्मदित्य के पुत्र, राजा श्री सूरुदासरुण आदित्य ने मालदीव में शासन की शुरुआत की। उनके शासनकाल में बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार हुआ और मालदीव की भाषा, लिपि और संस्कृति ने गहरी बौद्ध छाप को अपनाया।
आज भी मालदीव के कई द्वीपों पर प्राचीन बौद्ध मठों और स्तूपों के अवशेष पाए जाते हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘हवित्ता’ और ‘उस्तुबु’ कहा जाता है। इससे साफ होता है कि बौद्ध धर्म ने मालदीव की सभ्यता और समाज पर लंबा प्रभाव डाला था।
इस्लाम धर्म का आगमन और राजा धोवेमी की कहानी
9वीं और 10वीं सदी के बीच अरब व्यापारियों के जरिए इस्लाम मालदीव तक पहुंचा। लेकिन बड़ा बदलाव तब आया जब मालदीव के अंतिम बौद्ध राजा धोवेमी ने 1153 ई. में इस्लाम धर्म अपना लिया। राजा का नाम बदलकर सुल्तान मुहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह रखा गया। उनके इस कदम के बाद पूरे देश में इस्लाम तेजी से फैल गया और मालदीव इस्लामिक राष्ट्र बन गया।
इस ऐतिहासिक परिवर्तन के पीछे एक दिलचस्प लोककथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि उस समय मालदीव में एक समुद्री राक्षस रन्नामारी का आतंक था। उसे शांत करने के लिए हर महीने एक कुंवारी लड़की की बलि दी जाती थी। एक बार जब एक गरीब परिवार की बेटी की बारी आई, तब एक धर्मगुरु अबु अल-बरकात ने उस लड़की की जगह खुद मीनार में रात बिताई।
रातभर उन्होंने कुरआन की आयतें पढ़ीं और सुबह जब लोग आए तो देखा कि वह जीवित और सुरक्षित हैं। माना जाता है कि कुरआन की आयतें सुनकर राक्षस भाग गया। राजा धोवेमी ने वादा निभाया और इस्लाम धर्म अपनाया, जिससे मालदीव में इस्लामिक शासन की शुरुआत हुई।
विदेशी प्रभाव और आधुनिक मालदीव
मालदीव पर समय-समय पर कई विदेशी शक्तियों ने कब्जा किया। 1558 में पुर्तगालियों ने माले पर कब्जा किया, लेकिन 1573 में स्वतंत्रता मिली। 1887 में ब्रिटिशों से समझौते के बाद मालदीव ने आंतरिक शासन अपने हाथ में रखा, पर विदेश नीति ब्रिटिशों के पास थी। 26 जुलाई 1965 को मालदीव को पूर्ण स्वतंत्रता मिली।
2008 में नए संविधान के तहत मालदीव को इस्लामिक राष्ट्र घोषित किया गया, जहां नागरिकता के लिए इस्लाम को अनिवार्य कर दिया गया। लेकिन आज भी यहां के कुछ द्वीप बौद्ध इतिहास की निशानियों को संजोए हुए हैं।

