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Jharkhand News: झारखंड की धार्मिक परंपराएं गहराई और आस्था से ओतप्रोत रही हैं, खासकर खूंटी जिला शैव आराधना का प्रमुख केंद्र रहा है। इसी जिले के मुरहू प्रखंड स्थित बम्हणी गांव में मौजूद बारह शिवलिंगों को द्वादश ज्योतिर्लिंग का प्रतीक माना जाता है। ये शिवलिंग खुले आसमान के नीचे स्थित हैं और यहां पर सैकड़ों वर्षों से श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग खुश बहाल सिंह और उनकी पत्नी हरिला देवी बताते हैं कि उनके पूर्वज मूल रूप से मुरहू प्रखंड के गानालोया गांव से आए थे। एक दिन शिकार के दौरान उन्होंने एक ही स्थान पर बारह शिवलिंगों के दर्शन किए, जिसके बाद उन्होंने इस स्थान को अपना निवास बना लिया।
खुश बहाल सिंह मानते हैं कि यह स्थल महाभारत काल से जुड़ा हुआ है और यहां भगवान शिव के सर्वांग स्वरूप का दर्शन होता है। उन्होंने यह भी बताया कि इन बारह में से केवल एक शिवलिंग पर मंदिर निर्मित है, बाकी 11 शिवलिंग अब भी खुले आसमान के नीचे स्थित हैं। यह बात इस स्थान को और भी विशेष बनाती है।
झारखंड सरकार द्वारा शिवलिंगों के आसपास दो से तीन फीट की घेराबंदी कर दी गई है, ताकि संरचना सुरक्षित रह सके। इसके साथ ही पूरे परिसर की सुरक्षा के लिए भी घेराबंदी करवाई गई है। श्रद्धालु यहां रोजाना आते हैं, पर ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को यहां विशेष रूप से मंडा पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु भाग लेते हैं।
मंदिर में पूजा के लिए आईं मंजू देवी ने बताया कि यह पूजा परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने एक रोचक बात साझा की कि मंदिर के पास आदिकाल का एक तालाब भी स्थित है। मान्यता है कि पहले इस तालाब से कुछ भी मांगा जाए, तो उसकी पूर्ति होती थी। हालांकि अब यह परंपरा कमज़ोर हो गई है, लेकिन तालाब आज भी वहीं मौजूद है और श्रद्धालु वहां स्नान कर पूजा करते हैं।
यह स्थान न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन में एक सांस्कृतिक केंद्र भी बन चुका है। यहाँ की आस्था, परंपरा और इतिहास सभी मिलकर इसे एक अनूठा तीर्थ स्थल बनाते हैं।

